Thursday, March 5, 2026

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आत्मनिर्भरता की नई उड़ान: गोला-बारूद का 90% स्वदेशीकरण पूरा, भारतीय सेना की मारक क्षमता हुई और घातक

नई दिल्ली: ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में भारत ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गोला-बारूद का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अब स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया जा रहा है। इस कदम ने न केवल विदेशी देशों पर भारत की दशकों पुरानी निर्भरता को खत्म किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को एक उभरते हुए ‘डिफेंस हब’ के रूप में स्थापित कर दिया है।

रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम? रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी युद्ध में जीत के लिए हथियारों के साथ-साथ उनके गोला-बारूद की निरंतर आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण होती है। पहले, कई महत्वपूर्ण गोला-बारूद के लिए भारत को रूस, इजरायल और यूरोपीय देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे संकट के समय आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहता था। अब 90 प्रतिशत स्वदेशीकरण होने से सेना लंबी अवधि के युद्ध के लिए हर समय तैयार रह सकेगी।

छोटे हथियारों से लेकर मिसाइलों तक स्वदेशी दम इस स्वदेशीकरण अभियान में छोटे हथियारों की गोलियों से लेकर टैंक के गोले, आर्टिलरी गन के राउंड और एंटी-टैंक मिसाइलों तक को शामिल किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने ‘सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची’ (Positive Indigenisation Lists) के माध्यम से कई सौ वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिख रहे हैं। इसमें निजी क्षेत्र की कंपनियों और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) ने मिलकर रिकॉर्ड समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाई है।

बढ़ेगा रक्षा निर्यात और रोजगार स्वदेशीकरण के इस बड़े कदम से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है, बल्कि भारत अब अपनी रक्षा क्षमताओं का निर्यात भी कर रहा है। कई मित्र देशों ने भारत में बने गोला-बारूद में रुचि दिखाई है। इसके अलावा, इस पूरी प्रक्रिया से देश के भीतर एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बढ़ावा मिला है और हजारों की संख्या में कुशल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

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