अमरावती/राजमुंदरी: आंध्र प्रदेश के डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोणसीमा जिले में तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) के एक तेल कुएं में गैस रिसाव के बाद भीषण आग लग गई। यह हादसा उस समय हुआ जब कुएं के पास ड्रिलिंग या रखरखाव का काम चल रहा था। आग की लपटें इतनी ऊंची हैं कि उन्हें कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है। सूचना मिलते ही ओएनजीसी के विशेषज्ञों की टीम और दमकल विभाग के दस्ते मौके पर पहुंच गए हैं और आग पर काबू पाने के प्रयास लगातार जारी हैं।
कैसे हुआ हादसा?
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, जिले के पशुपतिलंका गांव के पास स्थित ओएनजीसी के एक कुएं से अचानक उच्च दबाव (High Pressure) के साथ गैस का रिसाव शुरू हो गया। देखते ही देखते गैस ने आग पकड़ ली और कुछ ही मिनटों में लपटों ने पूरे रिग (Rig) क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। राहत की बात यह रही कि आग लगते ही वहां मौजूद कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया, जिससे फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
राहत और बचाव कार्य
आग की विभीषिका को देखते हुए सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है:
- विशिष्ट टीमें: ओएनजीसी की ‘क्राइसिस मैनेजमेंट टीम’ (CMT) को राजमुंदरी और काकीनाडा से तुरंत मौके पर बुलाया गया है।
- बचाव तकनीक: विशेषज्ञ आग बुझाने के लिए भारी मात्रा में पानी और विशेष रसायनों (Foam) का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही, गैस के दबाव को कम करने के लिए तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं।
- आसपास का इलाका खाली: एहतियात के तौर पर प्रशासन ने कुएं के पास स्थित बस्तियों को खाली करा लिया है और वहां की बिजली आपूर्ति काट दी गई है।
प्रशासनिक सतर्कता
स्थानीय जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्थिति पर सीधी नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि मुख्य चुनौती गैस के निरंतर रिसाव को रोकना है, क्योंकि जब तक रिसाव बंद नहीं होता, आग को पूरी तरह बुझाना मुश्किल है। आसपास के गांवों के लोगों को सचेत रहने और कुएं की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
पर्यावरण पर प्रभाव की चिंता
गैस रिसाव और आग के कारण आसपास के नारियल के बागानों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने की आशंका है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने धुएं के कारण वायु गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता जताई है। ओएनजीसी के अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता पहले आग को नियंत्रित करना है, जिसके बाद रिसाव के कारणों की विस्तृत तकनीकी जांच की जाएगी।
यह घटना 1990 के दशक में हुए प्रसिद्ध ‘पासालापुडी अग्निकांड’ की याद दिलाती है, जिसे बुझाने में कई सप्ताह लग गए थे। हालांकि, ओएनजीसी का दावा है कि आधुनिक तकनीक की मदद से इस बार जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया जाएगा।





