गुवाहाटी। असम सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अंतर-धर्मी जमीन हस्तांतरण (Inter-Religion Land Transfer) के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अब ऐसे हर सौदे की पूरी जांच की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि, धोखाधड़ी या सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने वाले कदम पर रोक लगाई जा सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने साफ कहा—
“असम जैसे संवेदनशील राज्य में जमीन का मुद्दा सीधे सामाजिक और सांप्रदायिक ताने-बाने से जुड़ा हुआ है। नई SOP यह सुनिश्चित करेगी कि जमीन हस्तांतरण पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और वैध तरीके से हो।”
SOP का उद्देश्य
नई SOP का मुख्य मकसद जमीन सौदों को पारदर्शी बनाना और आदिवासी व स्थानीय समुदायों की जमीन को अवैध कब्जे से बचाना है। सरकार का मानना है कि जमीन के अवैध हस्तांतरण से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है।
इसके तहत:
• हर अंतर-धर्मी जमीन हस्तांतरण का प्रस्ताव पहले सरकार को भेजा जाएगा।
• खरीदार के पैसों का स्रोत, सौदे की वैधता और सामाजिक प्रभाव की बारीकी से जांच होगी।
• यह देखा जाएगा कि कहीं यह सौदा दबाव, धोखाधड़ी या किसी गैरकानूनी गतिविधि का हिस्सा तो नहीं।
• साथ ही यह भी परखा जाएगा कि डील से स्थानीय सामाजिक ढांचे या सामुदायिक सद्भाव को कोई नुकसान तो नहीं।
प्रक्रिया कैसी होगी?
1. प्रस्ताव की एंट्री – जमीन हस्तांतरण का प्रस्ताव सबसे पहले जिले के डिप्टी कमिश्नर (DC) के पास जमा होगा।
2. प्रारंभिक जांच – डिप्टी कमिश्नर इसकी जांच कर प्रस्ताव को राजस्व विभाग को भेजेंगे।
3. नोडल अधिकारी की भूमिका – राजस्व विभाग का नोडल अधिकारी प्रस्ताव को असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच को भेजेगा।
4. गहन जांच – स्पेशल ब्रांच खरीदार की पृष्ठभूमि, पैसों के स्रोत, संभावित धोखाधड़ी, सामाजिक असर और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे की गहन जांच करेगी।
5. अंतिम निर्णय – जांच रिपोर्ट फिर से डिप्टी कमिश्नर को भेजी जाएगी। अंतिम निर्णय उन्हीं के स्तर पर होगा कि हस्तांतरण को मंजूरी दी जाए या नहीं।
संवेदनशील मुद्दा क्यों है?
असम में जमीन का मसला हमेशा से संवेदनशील रहा है। स्थानीय और आदिवासी समुदायों की जमीन पर बाहरी या अवैध कब्जे की आशंका लंबे समय से उठती रही है। इसी वजह से सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है, ताकि अवैध लेनदेन पर रोक लगाई जा सके और असम का सामाजिक संतुलन सुरक्षित रखा जा सके।
बड़ा राजनीतिक संदेश
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह SOP असम में आदिवासी और स्थानीय समुदायों के हितों को साधने के साथ-साथ सरकार की “कानून-व्यवस्था और सुरक्षा” की नीति को मजबूत करने वाला कदम है। इससे भविष्य में विवादित जमीन सौदों और सामाजिक तनाव की स्थितियों को काफी हद तक रोका जा सकेगा।





