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असम चुनाव से पहले कांग्रेस को दोहरा झटका: सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार का इस्तीफा

गुवाहाटी (18 मार्च, 2026): असम विधानसभा चुनाव के मतदान से महज 20 दिन पहले राज्य में कांग्रेस पार्टी को एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के कद्दावर नेता और नागांव से दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने मंगलवार को अपने पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। चुनाव की दहलीज पर खड़े राज्य में इन दो बड़े चेहरों के जाने से कांग्रेस के चुनावी अभियान और संगठनात्मक ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचने की आशंका है।

इस्तीफे का घटनाक्रम: खरगे को भेजा पत्र

पार्टी के भीतर मचे इस घमासान की पुष्टि प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग ने की है:

  • सांसद का फैसला: प्रद्युत बोरदोलोई ने अपना आधिकारिक इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेज दिया है। बोरदोलोई असम की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं और उनका जाना ऊपरी असम में पार्टी के समीकरण बिगाड़ सकता है।
  • उपाध्यक्ष का साथ: नवज्योति तालुकदार ने भी पार्टी की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए उपाध्यक्ष पद छोड़ दिया है।

पारिवारिक कलह या राजनीतिक मतभेद?

पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले को ‘निजी’ बताने की कोशिश कर रहा है, जबकि पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और नजर आती है:

  1. टिकट वितरण पर रार: प्रद्युत बोरदोलोई के बेटे, प्रतीक बोरदोलोई, आगामी 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव में मार्गेरिटा सीट से कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार हैं। चर्चा है कि टिकटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर बोरदोलोई आलाकमान से नाराज चल रहे थे।
  2. नेतृत्व का दावा: एआईसीसी (AICC) के असम प्रभारी जितेन्द्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने स्थिति को संभालने की कोशिश करते हुए कहा कि यह “परिवार के भीतर के मतभेदों” का मामला है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि वे इन नेताओं को मनाने में सफल रहेंगे।

चुनावी समीकरणों पर असर

असम में चुनाव प्रचार चरम पर है, ऐसे समय में इन इस्तीफों के गहरे मायने हैं:

  • कार्यकर्ताओं का मनोबल: चुनाव से ठीक पहले शीर्ष नेताओं के पार्टी छोड़ने से कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
  • भाजपा को बढ़त: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह आंतरिक फूट सीधे तौर पर सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगियों को फायदा पहुंचा सकती है।
  • नागांव और मार्गेरिटा में चुनौती: बोरदोलोई का नागांव क्षेत्र में काफी प्रभाव है, उनके अलग होने से पार्टी को इस क्षेत्र की सीटों पर कड़ी मशक्कत करनी होगी।

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