गुवाहाटी: असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) में बीते कुछ घंटों से जारी अनिश्चितता और राजनीतिक उथल-पुथल फिलहाल शांत होती नजर आ रही है। असम कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने सांगठनिक मतभेदों के चलते अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपना फैसला वापस लेते हुए ‘यू-टर्न’ ले लिया। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे पार्टी के कद्दावर नेता और लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि गोगोई के साथ हुई लंबी चर्चा और उनके हस्तक्षेप के बाद भूपेन बोरा ने पार्टी के हित में अपना इस्तीफा वापस लेने पर सहमति जताई।
इस्तीफे की वजह: संगठन के भीतर बढ़ता असंतोष?
भूपेन बोरा के अचानक इस्तीफे के पीछे कई राजनीतिक कयास लगाए जा रहे थे:
- भीतरघात और गुटबाजी: सूत्रों का दावा है कि पार्टी के भीतर कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ तालमेल की कमी और आगामी चुनावों की रणनीति को लेकर बोरा असंतुष्ट चल रहे थे।
- सत्तापक्ष का दबाव: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा लगातार कांग्रेस नेताओं को लेकर दिए जा रहे बयानों के बीच संगठन को एकजुट रखने की चुनौती भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है।
- सांगठनिक जिम्मेदारी: बोरा का मानना था कि यदि उन्हें स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की छूट नहीं मिलती, तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।
गौरव गोगोई की एंट्री: वह ‘सीक्रेट मीटिंग’ जिसने सब बदल दिया
जब इस्तीफे की खबर दिल्ली तक पहुँची, तो गौरव गोगोई को संकट सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई:
- सीधी बातचीत: गौरव गोगोई और भूपेन बोरा के बीच एक बंद कमरे में लंबी बैठक हुई। गोगोई ने बोरा को आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों को पार्टी आलाकमान के सामने गंभीरता से रखा जाएगा।
- एकजुटता का संदेश: गोगोई ने बोरा को समझाया कि इस नाजुक मोड़ पर उनका पद छोड़ना भाजपा को लाभ पहुँचा सकता है और पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा सकता है।
- भविष्य की रणनीति: बैठक में तय हुआ कि आने वाले समय में पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ काम करेगी और संगठन के भीतर होने वाले निर्णयों में प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका को सर्वोपरि रखा जाएगा।
यू-टर्न के बाद क्या बोले भूपेन बोरा?
इस्तीफा वापस लेने के बाद भूपेन बोरा ने मीडिया से बातचीत में स्थिति स्पष्ट की:
- पार्टी सर्वोपरि: उन्होंने कहा कि भावनाओं में बहकर उन्होंने यह कदम उठाया था, लेकिन गौरव गोगोई और अन्य साथियों के आग्रह के बाद वे पद पर बने रहने के लिए तैयार हैं।
- भाजपा को चुनौती: बोरा ने कहा कि असम कांग्रेस अब और अधिक मजबूती के साथ भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध करेगी और पार्टी में किसी भी प्रकार की गुटबाजी के लिए जगह नहीं होगी।





