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अश्वगंधा के इस्तेमाल पर FSSAI का बड़ा फैसला: पत्तियों के उपयोग पर लगाया प्रतिबंध; नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई

नई दिल्ली: स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने वाले लोगों और सप्लीमेंट उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आयुष मंत्रालय के परामर्श के बाद अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत, अब खाद्य पदार्थों और स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स (Health Supplements) में अश्वगंधा की पत्तियों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, इस पौधे की जड़ के औषधीय इस्तेमाल की अनुमति पहले की तरह बरकरार रहेगी।

16 अप्रैल को जारी हुआ सख्त आदेश: राज्यों को निगरानी के निर्देश

FSSAI ने 16 अप्रैल को एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सतर्क कर दिया है।

  • कड़ी निगरानी: प्राधिकरण ने निर्देश दिया है कि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स की बारीकी से जांच की जाए।
  • कानूनी कार्रवाई: यदि कोई निर्माता या कंपनी बिना वैध अनुमति के अपने उत्पादों में अश्वगंधा की पत्तियों का इस्तेमाल करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सिर्फ जड़ के इस्तेमाल की इजाजत, पत्तियों पर रोक क्यों?

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान में अश्वगंधा के अलग-अलग हिस्सों के प्रभावों पर लंबे समय से शोध चल रहा है।

  • पारंपरिक महत्व: विशेषज्ञों के अनुसार, आयुर्वेदिक चिकित्सा में अश्वगंधा की जड़ (Root) के उपयोग का हजारों साल पुराना इतिहास है और इसके औषधीय गुणों को सुरक्षित माना गया है।
  • सुरक्षा मानक: अश्वगंधा की पत्तियों के व्यापक और अनियंत्रित उपयोग को लेकर पर्याप्त सुरक्षा डेटा उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रशासन ने यह कदम उठाया है। FSSAI का मानना है कि खाद्य उत्पादों में पत्तियों के उपयोग से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

अश्वगंधा के गलत इस्तेमाल से होने वाले संभावित नुकसान

अश्वगंधा एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी है, लेकिन इसका गलत तरीके से या अत्यधिक मात्रा में सेवन स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसके कुछ संभावित नुकसानों के प्रति सचेत किया है:

  1. पाचन संबंधी समस्याएं: अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट खराब होना, दस्त और मतली (उल्टी जैसा महसूस होना) की शिकायत हो सकती है।
  2. ब्लड शुगर और बीपी पर असर: यह शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है, इसलिए मधुमेह और बीपी की दवा ले रहे मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  3. नींद और सुस्ती: इसके अत्यधिक सेवन से दिनभर सुस्ती महसूस हो सकती है।
  4. हार्मोनल असंतुलन: कुछ मामलों में यह थायराइड के स्तर को प्रभावित कर सकता है।

उपभोक्ताओं और निर्माताओं के लिए संदेश

FSSAI के इस कदम का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध ‘हर्बल’ और ‘नेचुरल’ के नाम पर बिकने वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे सप्लीमेंट खरीदते समय सामग्री की सूची (Ingredients list) को ध्यान से देखें। वहीं, कंपनियों को अब अपने उत्पादों के फॉर्मूलेशन में बदलाव करना होगा ताकि वे नए सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो सकें।

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