Wednesday, February 4, 2026

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अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में फिर हुई रैगिंग: 4 साल में तीसरी घटना, 6 सीनियर छात्रों पर गिरी गाज

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के एकमात्र मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में कॉलेज प्रशासन ने जूनियर छात्रों के उत्पीड़न के आरोप में एमबीबीएस के छह सीनियर छात्रों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है।

क्या है पूरा मामला?

  • जूनियर छात्रों की शिकायत: वर्ष 2025 बैच (प्रथम वर्ष) के कुछ छात्र-छात्राओं ने कॉलेज प्राचार्य को लिखित शिकायत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 बैच के सीनियर छात्रों ने उन्हें अपने कमरों में बुलाया और उन पर ‘अतिरिक्त सह-शैक्षणिक गतिविधियों’ (Co-curricular activities) के नाम पर दबाव बनाया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
  • एंटी-रैगिंग कमेटी की जांच: शिकायत मिलते ही कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी ने मामले की जांच की। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई।

दोषी छात्रों पर की गई कार्रवाई:

कॉलेज प्रशासन ने अनुशासन बनाए रखने के लिए निम्नलिखित सख्त कदम उठाए हैं:

  1. आर्थिक जुर्माना: रैगिंग में शामिल चार सीनियर छात्रों पर 25,000-25,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया गया है।
  2. प्रतिबंध: दो अन्य छात्रों को अगले 6 महीनों के लिए कॉलेज में होने वाले सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कार्यक्रमों (Events) में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
  3. कड़ी चेतावनी: कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीपी भैसोड़ा ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी गलती दोहराने पर छात्रों को कॉलेज से सीधे निष्कासित (Expel) किया जा सकता है।

चार साल में तीसरी घटना: छवि पर संकट

  • पहला मामला: कॉलेज की स्थापना के शुरुआती समय (2022) में ही रैगिंग की घटना चर्चा में आई थी।
  • दूसरा मामला: लगभग आठ महीने पहले (मई-जून 2025) में भी ऐसा ही प्रकरण सामने आया था, जिसे काउंसलिंग के बाद शांत कराया गया था।
  • वर्तमान स्थिति: बार-बार हो रही इन घटनाओं से अभिभावकों में असुरक्षा का माहौल है। एंटी-रैगिंग कमेटी होने के बावजूद घटनाओं की पुनरावृत्ति कॉलेज के प्रशासनिक नियंत्रण पर सवाल उठा रही है।

कॉलेज प्रशासन का पक्ष: “हम परिसर को पूरी तरह रैगिंग मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। समय-समय पर छात्रों और अभिभावकों की काउंसलिंग की जा रही है, लेकिन अनुशासन तोड़ने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।” — प्रो. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य

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