हरिद्वार/देहरादून। आगामी अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों के तहत उत्तराखंड सरकार ने हरिद्वार को “संस्कृतमय” बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत अब शहर के सभी सरकारी और निजी संस्थानों के साइनबोर्ड पर संस्कृत भाषा का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सड़क संकेत, सूचना पट्ट, कार्यालयों के नामपट और सार्वजनिक स्थानों पर लगे सभी बोर्डों पर हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ संस्कृत में भी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ हरिद्वार की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूत करना है।
अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निजी संस्थान, शैक्षणिक संस्थान, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी लागू होगी। इसके लिए प्रशासन संस्कृत विशेषज्ञों की मदद लेगा, ताकि भाषा का सही और शुद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि हरिद्वार धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र है, ऐसे में अर्धकुंभ जैसे बड़े आयोजन से पहले इसे संस्कृत आधारित पहचान देना एक ऐतिहासिक कदम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा अनुभव मिलेगा। साथ ही यह पहल उत्तराखंड की “दूसरी राजभाषा” संस्कृत को व्यवहारिक रूप में बढ़ावा देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है।
हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि इस तरह की व्यापक भाषा नीति को लागू करने में तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं, जैसे कि सही अनुवाद, स्थानीय कर्मचारियों का प्रशिक्षण और निरंतर निगरानी।





