वाशिंगटन: अमेरिका के रक्षा विभाग (पेंटागन) ने आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को देखते हुए एक बड़े रणनीतिक बदलाव की घोषणा की है। रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन ने लगभग 54 अरब डॉलर (करीब 45 लाख करोड़ रुपये) की एक विशाल योजना तैयार की है, जिसके तहत बड़ी संख्या में कम लागत वाले लड़ाकू ड्रोन (लो-कॉस्ट कॉम्बैट ड्रोन) विकसित और तैनात किए जाएंगे।
इस योजना का उद्देश्य भविष्य के युद्धों में पारंपरिक हथियारों पर निर्भरता कम कर ड्रोन-आधारित युद्ध क्षमता को बढ़ाना है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के तहत अमेरिकी सेना हजारों की संख्या में ऐसे ड्रोन तैनात करेगी जो कम लागत में भी सटीक हमला करने में सक्षम होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, यह पहल “ड्रोन डॉमिनेंस (Drone Dominance)” कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिका तेजी से ऐसे ड्रोन विकसित करना चाहता है जिन्हें बड़े पैमाने पर कम समय में बनाया और इस्तेमाल किया जा सके। इसका लक्ष्य भविष्य के युद्धों में दुश्मन पर संख्या और तकनीक दोनों के जरिए बढ़त हासिल करना है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य हालिया संघर्षों में छोटे और सस्ते ड्रोन की प्रभावशीलता देखने के बाद अमेरिका ने अपनी रणनीति में यह बड़ा बदलाव किया है। इन ड्रोन को “एक्सपेंडेबल यानी उपयोग के बाद नष्ट होने योग्य हथियार” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे महंगे हथियारों पर निर्भरता कम हो सके।
रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन का लक्ष्य आने वाले वर्षों में लाखों की संख्या में ड्रोन उत्पादन क्षमता विकसित करना है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बड़े पैमाने पर तैनात किया जा सके। इसके साथ ही ड्रोन तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन को भी शामिल किया जाएगा, जिससे उनकी सटीकता और रफ्तार बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने इतनी बड़ी राशि के उपयोग, तकनीकी निर्भरता और नैतिक पहलुओं को लेकर सवाल भी उठाए हैं।
फिलहाल यह प्रस्ताव प्रारंभिक चरण में है और इसे अमेरिकी संसद की मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ाया जाएगा। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो यह अमेरिका के सैन्य इतिहास में ड्रोन और एआई आधारित युद्ध प्रणाली का सबसे बड़ा निवेश माना जाएगा।





