नई दिल्ली: अमेरिका में नवनिर्वाचित प्रशासन द्वारा आयात शुल्क (Tariffs) को लेकर दी जा रही चेतावनियों और वैश्विक व्यापार में मचे घमासान पर भारत ने फिलहाल सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस अंतरराष्ट्रीय आर्थिक तनाव के भारत पर पड़ने वाले असर के सवाल पर कहा कि इस मामले में अभी कोई भी निष्कर्ष निकालना ‘जल्दबाजी’ होगी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार वैश्विक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रही है, लेकिन आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से पहले स्थिति के पूरी तरह स्पष्ट होने का इंतजार करना बेहतर है।
क्या है अमेरिका का ‘टैरिफ घमासान’?
अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही व्यापारिक नीतियों को लेकर सख्त रुख अपनाया जा रहा है:
- आयात शुल्क में वृद्धि की चेतावनी: अमेरिकी प्रशासन ने चीन, कनाडा और मेक्सिको जैसे देशों समेत कई वैश्विक साझेदारों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाने के संकेत दिए हैं।
- संरक्षणवाद की ओर झुकाव: अमेरिका का तर्क है कि वह अपने घरेलू उद्योगों को बचाने और व्यापार घाटे को कम करने के लिए ये कदम उठा सकता है।
- वैश्विक बाजारों में चिंता: इन चेतावनियों के बाद से ही वैश्विक शेयर बाजारों और सप्लाई चेन विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर डर है कि इससे नया ‘ट्रेड वॉर’ (व्यापार युद्ध) शुरू हो सकता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का रुख
एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए वित्त मंत्री ने भारत का पक्ष मजबूती से रखा:
- गहन विश्लेषण की जरूरत: सीतारमण ने कहा कि जब तक नीतियां आधिकारिक तौर पर लागू नहीं हो जातीं, तब तक उनके काल्पनिक असर पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
- भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती: उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की अर्थव्यवस्था के बुनियादी सिद्धांत मजबूत हैं और देश किसी भी वैश्विक आर्थिक झटके को सहने में सक्षम है।
- सतर्कता ही समाधान: वित्त मंत्री ने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय की टीमें लगातार विभिन्न देशों की घोषणाओं और उनके संभावित व्यापारिक प्रभावों का डेटा विश्लेषण कर रही हैं।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के इस कदम के भारत के लिए दोहरे परिणाम हो सकते हैं:
- चुनौती: यदि अमेरिका भारत से जाने वाले आईटी (IT) सेवाओं, फार्मा या टेक्सटाइल पर शुल्क बढ़ाता है, तो निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है।
अवसर: यदि अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ता है, तो भारत ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के तहत दुनिया के लिए एक बेहतर विनिर्माण विकल्प (Manufacturing Hub) बनकर उभर सकता है।





