Sunday, November 30, 2025

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अमेरिका: प्रवासन पर स्थायी रोक लगाने के अपने रुख पर अड़े ट्रंप

वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में प्रवासन पर कड़ी पाबंदियों को जारी रखने और इसे स्थायी रूप से लागू करने की अपनी मांग को एक बार फिर दोहराया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से लगाई जा रही अपीलों और चिंताओं को खारिज करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि अमेरिका की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए प्रवासन प्रतिबंधों को ढीला करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अनियंत्रित प्रवासन से देश को गंभीर सामाजिक और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अमेरिकी सीमाओं को सुरक्षित करना और अवैध प्रवास को रोकना उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले वर्षों में बढ़ी प्रवासन गतिविधियों ने देश के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाला है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बढ़ा है।

संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में अमेरिका से प्रवासन प्रतिबंधों को नरम करने की अपील की थी, ताकि संघर्ष क्षेत्रों, आर्थिक अस्थिरता और मानवाधिकार उल्लंघनों से भाग रहे लोगों को राहत मिल सके। UN ने चेतावनी दी थी कि कड़े प्रतिबंधों से मानवीय संकट गहरा सकता है और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का उल्लंघन भी हो सकता है। हालांकि ट्रंप ने इस अपील को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका “अपनी सुरक्षा को समझौते पर नहीं छोड़ सकता”।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए प्रवासन मुद्दे को मजबूती से उठाते रहे हैं। उनके समर्थक समूह इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संरक्षण के मुद्दे के रूप में देखते हैं, जबकि विरोधी इसे मानवीय मूल्यों के खिलाफ बताते हैं। ट्रंप का यह रुख अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर प्रवासन नीति को तीखे राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला रहा है।

इमिग्रेशन नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप अपनी योजना पर अमल करते हैं, तो इससे अमेरिका की मौजूदा प्रवासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। विशेष रूप से उन लोगों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा जो अपने देशों में हिंसा, अत्याचार या आर्थिक संकट के कारण सुरक्षित विकल्प की तलाश में अमेरिका का रुख करते हैं।

कुल मिलाकर, ट्रंप के इस बयान ने प्रवासन नीति पर चल रही अंतरराष्ट्रीय बहस को और तेज कर दिया है। UN की अपील खारिज करने के बाद अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका अपनी भविष्य की प्रवासन रणनीति किस दिशा में ले जाता है।

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