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अनिल अंबानी के रिलायंस समूह पर ईडी की बड़ी कार्रवाई: 12 राज्यों में फैली 581 करोड़ की संपत्तियां जब्त

नई दिल्ली/मुंबई (13 मार्च, 2026): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह के खिलाफ अपनी जांच तेज करते हुए एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने समूह की 581 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को कुर्क (जब्त) करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई देशव्यापी तलाशी अभियान और लंबी जांच के बाद मिली महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर की गई है। जब्त की गई संपत्तियों में मुख्य रूप से बेशकीमती जमीनों के टुकड़े शामिल हैं, जो भारत के विभिन्न राज्यों में रणनीतिक स्थानों पर स्थित हैं।

देशव्यापी कार्रवाई: 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में जब्ती

ईडी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जब्ती का यह आदेश 11 मार्च को जारी किया गया था। जांच एजेंसी ने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फैले 12 राज्यों में रिलायंस समूह की संपत्तियों को अपने कब्जे में लिया है:

  • उत्तर भारत: दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश।
  • दक्षिण भारत: कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश।
  • पश्चिम और मध्य भारत: महाराष्ट्र, राजस्थान और गोवा।
  • पूर्वी भारत: पश्चिम बंगाल और झारखंड।

इन संपत्तियों में व्यावसायिक और औद्योगिक उपयोग के लिए रखे गए भूखंड शामिल हैं, जिन्हें जांच के घेरे में लिया गया है।

तलाशी अभियान के बाद लिया गया निर्णय

यह बड़ी कार्रवाई हाल ही में समूह के विभिन्न ठिकानों पर की गई सघन तलाशी और दस्तावेजों की जांच के बाद की गई है:

  1. मनी लॉन्ड्रिंग की जांच: सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही जांच का हिस्सा है।
  2. आय के स्रोतों पर सवाल: ईडी उन वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है, जिनके जरिए इन संपत्तियों को खरीदा गया था। एजेंसी को संदेह है कि इन संपत्तियों की खरीद में नियमों का उल्लंघन किया गया हो सकता है।
  3. दस्तावेजों का मिलान: छापेमारी के दौरान जब्त किए गए डिजिटल सबूतों और कागजातों के विश्लेषण के बाद ही इन विशिष्ट संपत्तियों को कुर्क करने का निर्णय लिया गया।

रिलायंस समूह और अनिल अंबानी की बढ़ती मुश्किलें

अनिल अंबानी का रिलायंस समूह पिछले कुछ वर्षों से लगातार भारी कर्ज और कानूनी लड़ाइयों का सामना कर रहा है।

  • दिवाला प्रक्रिया: समूह की कई कंपनियां पहले से ही दिवाला समाधान प्रक्रिया (Insolvency) से गुजर रही हैं।
  • एजेंसी का शिकंजा: ताजा जब्ती आदेश के बाद समूह की वित्तीय साख पर और अधिक दबाव पड़ने की संभावना है।
  • कानूनी पक्ष: हालांकि रिलायंस समूह की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उम्मीद है कि समूह इस आदेश को उच्च न्यायालय या अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दे सकता है।

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