देहरादून/पौड़ी: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में जांच का दायरा बढ़ाते हुए प्रशासन अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। मामले में संदिग्ध भूमिका और विरोधाभासी बयानों को देखते हुए अब अभिनेत्री उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर का नार्को टेस्ट कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है। माना जा रहा है कि इस टेस्ट के जरिए उस ‘वीआईपी’ गेस्ट और हत्या के पीछे छिपे अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठ सकेगा।
क्यों पड़ी नार्को टेस्ट की जरूरत?
एसआईटी (SIT) और जांच एजेंसियों के सामने इस मामले में शुरू से ही कई सवाल अनुत्तरित रहे हैं। अभिनेत्री उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर के नाम इस मामले में अलग-अलग मोड़ पर सामने आए थे।
- बयानों में विरोधाभास: जांच के दौरान दोनों के बयानों में कई विसंगतियां पाई गई थीं, जिससे जांच टीम को संदेह है कि वे कुछ महत्वपूर्ण तथ्य छिपा रहे हैं।
- सत्यता की परख: पुलिस का मानना है कि नार्को टेस्ट के दौरान जब मस्तिष्क की सचेत अवस्था को शिथिल किया जाएगा, तब इन दोनों से प्राप्त जानकारी मामले की कड़ियों को जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।
क्या है नार्को टेस्ट की प्रक्रिया?
नार्को टेस्ट (Narco Analysis Test) में व्यक्ति को ‘सोडियम पेंटोथल’ जैसी दवाओं का इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे वह अर्ध-मूर्छित अवस्था में चला जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति के लिए झूठ बोलना या काल्पनिक कहानियां गढ़ना लगभग असंभव हो जाता है।
- यह टेस्ट चिकित्सा विशेषज्ञों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की निगरानी में किया जाता है।
- इसकी वीडियोग्राफी भी की जाती है ताकि अदालत में इसे साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया जा सके।
‘वीआईपी’ गेस्ट की पहचान पर टिकी निगाहें
अंकिता भंडारी मामले में सबसे बड़ा विवाद उस ‘वीआईपी’ गेस्ट को लेकर है, जिसे ‘विशेष सेवा’ देने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। परिजनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि रसूखदार लोगों को बचाने के लिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई। अब उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर से होने वाली इस वैज्ञानिक पूछताछ से यह साफ होने की उम्मीद है कि उस दिन रिजॉर्ट में वास्तव में क्या हुआ था और वह ‘वीआईपी’ कौन था।
परिजनों को न्याय का इंतजार
अंकिता के माता-पिता लंबे समय से इस मामले में नार्को टेस्ट कराने की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि जब तक पर्दे के पीछे बैठे असली मास्टरमाइंड बेनकाब नहीं होते, तब तक उनकी बेटी को सच्चा न्याय नहीं मिलेगा। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद अब जांच एजेंसियां इस टेस्ट की तिथि निर्धारित कर रही हैं।





