विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन द्वारा तय की जा रही नई वैश्विक शर्तें दुनिया में अस्थिरता को बढ़ा रही हैं। इस शक्ति प्रतिस्पर्धा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और आर्थिक प्रवाह पर पड़ रहा है, जिससे कई देशों को अनिश्चितता और दबाव झेलना पड़ रहा है।
जयशंकर के अनुसार, वैश्विक नेतृत्व की बदलती परिभाषा और बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और दबावों के आधार पर नियमों और मानकों को आकार देने लगती हैं, तो इसका प्रभाव व्यापक रूप से महसूस किया जाता है। इससे न केवल बाजार अस्थिर होते हैं, बल्कि विकासशील देशों की आर्थिक योजना भी प्रभावित होती है।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव का सीधा असर रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था और उत्पादन पर पड़ रहा है। कई महत्वपूर्ण वस्तुओं और तकनीकों की उपलब्धता कम हो रही है, जबकि परिवहन और निर्माण लागत तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए देशों को अपनी रणनीतियों और साझेदारियों को अधिक लचीला और विविधीकृत बनाना होगा।
डॉ. जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ऐसी परिस्थितियों में एक स्थिर, विश्वसनीय और संतुलित साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने पर काम कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे परस्पर निर्भरता की वास्तविकताओं को समझें और मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करें जो किसी एक शक्ति के दबाव में न आए।
विदेश मंत्री के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आर्थिक नीति के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिवेश का सामना कर रही है।





