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UPI से भुगतान रहेगा मुफ्त, बड़े लेनदेन पर ही लग सकता है MDR

नई दिल्ली। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए भुगतान करने वाले ग्राहकों को फिलहाल किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आम लोगों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि भविष्य में यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जाता है तो उसका दायरा सीमित रखा जाएगा।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, रोजमर्रा के भुगतान और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में केवल चुनिंदा कारोबारी लेनदेन को MDR के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। यह शुल्क ग्राहकों के बजाय संबंधित व्यापारियों से लिया जाता है।

सरकार की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब UPI लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बाद उपभोक्ताओं के बीच आशंका पैदा हुई थी। मंत्रालय ने कहा है कि UPI को आम नागरिकों के लिए सुलभ और कम लागत वाला डिजिटल भुगतान माध्यम बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

संभावित MDR को लेकर अभी अंतिम दर और सीमा तय नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, बड़े व्यापारियों और अधिक मूल्य वाले लेनदेन को इसके दायरे में लाने का विकल्प विचाराधीन है। कुछ प्रस्तावों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर सीमित MDR लगाने की संभावना जताई गई है, हालांकि अंतिम निर्णय सरकार की ओर से किया जाना बाकी है।

UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन, तकनीकी ढांचे और साइबर सुरक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर भी चर्चा बढ़ी है। MDR लागू करने के समर्थकों का तर्क है कि इससे भुगतान कंपनियों और बैंकों को डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे में निवेश के लिए आय का स्रोत मिल सकता है।

सरकार का जोर हालांकि इस बात पर है कि किसी भी संभावित शुल्क का असर आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के UPI भुगतान पर न पड़े। इस तरह फिलहाल UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए राहत कायम है, जबकि बड़े कारोबारी लेनदेन पर शुल्क की संभावित व्यवस्था को लेकर तस्वीर अंतिम निर्णय के बाद ही साफ होगी।

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