संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अफगानिस्तान की आंतरिक स्थिति को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया, लेकिन भारत ने इस पर वोटिंग से खुद को अलग रखने का निर्णय लिया। प्रस्ताव के पक्ष में 116 वोट पड़े, जबकि अमेरिका और इजरायल ने इसके खिलाफ मतदान किया और भारत सहित 12 देशों ने वोटिंग में भाग नहीं लिया।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने महासभा में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि अफगानिस्तान की जटिल स्थिति को केवल दंड की नीति से नहीं सुलझाया जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक समुदाय को सकारात्मक पहल करनी होगी, अन्यथा “जैसे चल रहा है, वैसे ही चलने दो” वाला रवैया अफगान नागरिकों के लिए सार्थक परिणाम नहीं ला पाएगा।
भारत ने क्यों बनाई दूरी?
हरीश ने कहा, “संघर्ष के बाद की स्थिति को संभालने के लिए संतुलित रणनीति आवश्यक होती है। केवल प्रतिबंध और आलोचना से समाधान नहीं निकलेगा। हमें सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करना होगा और गलत गतिविधियों को हतोत्साहित करना होगा।”
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वह सुनिश्चित करे कि अफगानिस्तान की धरती का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए न हो। उन्होंने अल-कायदा, आईएसआईएल, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों और उनके क्षेत्रीय समर्थकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील की।
भारत का मानवीय योगदान
हरीश ने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता देने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। अगस्त 2021 से अब तक भारत ने 50,000 मीट्रिक टन गेहूं, 330 मीट्रिक टन दवाइयां, टीके, 40,000 लीटर कीटनाशक (मालाथियॉन) और 58.6 मीट्रिक टन अन्य आवश्यक सामग्री भेजी है।
इसके अलावा, UNODC के साथ मिलकर भारत ने 84 मीट्रिक टन दवाएं और 32 मीट्रिक टन सामाजिक सहायता सामग्री, विशेष रूप से महिलाओं के लिए पुनर्वास कार्यक्रमों के तहत उपलब्ध कराई है। साथ ही 2023 से अब तक भारत ने 2,000 अफगान छात्रों को छात्रवृत्तियां भी प्रदान की हैं।
तालिबान के साथ संपर्क
हरीश ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और तालिबान के विदेश मंत्री के बीच हाल में हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अफगान पक्ष ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की थी। इसके अतिरिक्त, भारत के विदेश सचिव और तालिबान प्रतिनिधियों के बीच भी क्षेत्रीय मुद्दों पर वार्ताएं हुईं।
“हम अफगान जनता के साथ हैं”
भारत ने यह दोहराया कि वह अफगान जनता के साथ गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मान्यता देता है और उनकी शांति, स्थिरता तथा विकास के लिए हमेशा खड़ा रहेगा।
हरीश ने कहा, “भारत एक शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध अफगानिस्तान के लिए सभी वैश्विक प्रयासों का समर्थन करता है, लेकिन मौजूदा प्रस्ताव की प्रकृति को देखते हुए हमने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया है।”





