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UN में भारत का पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार: ‘इस्लामोफोबिया की मनगढ़ंत कहानियां गढ़ना बंद करे पड़ोसी देश’

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली (17 मार्च, 2026): संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के दोहरे मापदंडों और उसके दुष्प्रचार की धज्जियां उड़ाई हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरिश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि दुनिया को अब धार्मिक पहचान को ‘राजनीतिक हथियार’ बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे ‘पश्चिमी पड़ोसी’ संबोधित करते हुए कहा कि वह देश खुद मानवाधिकारों के हनन में लिप्त है, लेकिन दूसरों के खिलाफ काल्पनिक कहानियां गढ़ने में सबसे आगे रहता है।

धार्मिक पहचान का राजनीतिकरण: भारत की गंभीर चेतावनी

राजदूत पार्वथनेनी हरिश ने वैश्विक मंच पर बढ़ती कट्टरता और धर्म के नाम पर की जा रही राजनीति के खतरों से आगाह किया:

  • राजनीतिक हथियार: भारत ने कहा कि वर्तमान समय में कुछ ‘राज्य’ (State) और ‘गैर-राज्य’ (Non-state) तत्व धार्मिक पहचान का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए कर रहे हैं।
  • पाकिस्तान की पोल खोली: हरिश ने कड़े शब्दों में कहा कि भारत का पश्चिमी पड़ोसी देश ‘इस्लामोफोबिया’ की काल्पनिक और मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने में माहिर है, ताकि वह अपने पड़ोसियों की छवि खराब कर सके।

तीन कड़े सवाल: पाकिस्तान की क्रूरता को भारत ने किया बेनकाब

भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और शरणार्थियों की स्थिति पर तीन चुभते हुए सवाल पूछकर उसे आईना दिखाया:

  1. अहमदियों का दमन: हरिश ने सवाल किया कि पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के खिलाफ जो ‘क्रूर दमन’ और हिंसक कार्रवाई की जा रही है, उसे क्या नाम दिया जाना चाहिए?
  2. अफगान शरणार्थियों की घर वापसी: उन्होंने पूछा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रखकर बेबस अफगानों को जिस तरह बड़े पैमाने पर सीमा से वापस धकेला गया, उसे दुनिया किस श्रेणी में रखेगी?
  3. रमजान में बमबारी: भारत ने सबसे गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि पवित्र रमजान के महीने में अपनी ही सीमाओं के पास चलाए गए ‘हवाई बमबारी अभियानों’ को पाकिस्तान इस्लामोफोबिया कहेगा या कुछ और?

भारत का रुख: सभी धर्मों के खिलाफ नफरत का हो विरोध

भारत ने स्पष्ट किया कि नफरत किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी रूपों में गलत है:

  • चयनात्मक दृष्टिकोण का विरोध: भारत ने कहा कि केवल ‘इस्लामोफोबिया’ की बात करना और हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के खिलाफ बढ़ती नफरत को नजरअंदाज करना गलत है।
  • सबका सम्मान: भारतीय प्रतिनिधि ने दोहराया कि भारत एक ऐसा लोकतंत्र है जहाँ सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है, जबकि पाकिस्तान अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए धार्मिक नारों का सहारा लेता है।

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