नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। दुनिया के सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देश चीन ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय जलवायु सम्मेलन में ऐतिहासिक घोषणा की। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन 2035 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को 7 से 10 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखेगा। यह कदम चीन की जलवायु परिवर्तन के खिलाफ गंभीरता को दर्शाता है, क्योंकि यह देश अब तक दुनिया में सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करता रहा है, जो वैश्विक कुल उत्सर्जन का लगभग 31 प्रतिशत है।
वैश्विक नेताओं के समक्ष घोषणा
इस घोषणा के समय 100 से अधिक विश्व नेता एकत्रित थे, जिनका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन को गंभीरता से कम करने की रणनीति तय करना था। महासभा के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक नेताओं से कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की स्पष्ट योजना प्रस्तुत करने का आग्रह किया।
शी जिनपिंग ने वीडियो संदेश के माध्यम से यह भी कहा कि चीन 2020 के मुकाबले अपनी पवन और सौर ऊर्जा क्षमता को छह गुना बढ़ाएगा, आम उपयोग के लिए बिना प्रदूषण वाले वाहन बनाएगा और एक ऐसा समाज तैयार करेगा जो जलवायु परिवर्तन की प्रभावकारी चुनौतियों से निपट सके।
यूरोप का जवाब और नीति संकेत
चीन की घोषणा के बाद यूरोप ने भी जलवायु परिवर्तन से निपटने की नई योजना का संकेत दिया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुल वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाया है और कार्बन उत्सर्जन पर टैक्स बढ़ाया है। इसके चलते यूरोप का कुल कार्बन उत्सर्जन 1940 से अब तक लगभग 40 प्रतिशत घट गया।
सदस्य देशों ने सहमति जताई कि उनका राष्ट्रीय योगदान 66 से 72 प्रतिशत के बीच रहेगा और वे नवंबर में होने वाली जलवायु वार्ता से पहले अपनी योजना संयुक्त राष्ट्र को सौंपेंगे।
ट्रंप पर तंज और वैश्विक चेतावनी
शी जिनपिंग और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन को लेकर आलोचना पर अप्रत्यक्ष तंज कसा। शी ने कहा, “जब कुछ देश इसके खिलाफ काम कर रहे हैं, तब भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सही दिशा में फोकस रखना चाहिए।”
लूला ने कहा, “जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से कोई भी सुरक्षित नहीं है। सीमा पर दीवारें सूखा या तूफान को नहीं रोक सकतीं। प्रकृति बमों या युद्धपोतों से नहीं डरती। कोई भी देश दूसरे से ऊपर नहीं है। हम सभी हार सकते हैं, क्योंकि खारिज करने की मानसिकता जीत सकती है।”
विज्ञान और नीति का आह्वान
UN महासचिव गुटेरेस ने चेताया कि विज्ञान कार्रवाई की मांग करता है, कानून इसे अनिवार्य बनाता है, अर्थव्यवस्था इसे आवश्यक बनाती है और लोग इसकी मांग कर रहे हैं। उनका कहना था कि वैश्विक समुदाय को तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है।





