Saturday, January 31, 2026

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‘UCC लागू कर उत्तराखंड ने रचा इतिहास’: कानून के एक साल पूरे होने पर बोले सीएम धामी; कहा- यह देश के लिए बनेगा मॉडल

देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हुए एक वर्ष का समय सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए अपनी भावनाओं को साझा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि UCC की घोषणा करने से लेकर इसके धरातल पर क्रियान्वयन तक का सफर उनके लिए ‘गौरव की अनुभूति’ कराने वाला रहा है। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने अपनी देवभूमि की संस्कृति की रक्षा और सभी नागरिकों को समान अधिकार देने के लिए इस क्रांतिकारी कानून को अपनाया है।

मुख्यमंत्री का संबोधन: “संकल्प से सिद्धि तक का सफर”

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि UCC का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय के खिलाफ जाना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाना है।

  • ऐतिहासिक निर्णय: सीएम ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले जनता से किया गया सबसे बड़ा वादा आज एक सशक्त कानून के रूप में धरातल पर उतर चुका है।
  • समानता का अधिकार: उन्होंने जोर देकर कहा कि अब राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में सभी धर्मों और समुदायों के लिए एक ही कानून प्रभावी है, जो सामाजिक न्याय की दिशा में मील का पत्थर है।

UCC के एक वर्ष: क्या बदला धरातल पर?

सरकार ने पिछले एक वर्ष के दौरान कानून के सफल संचालन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  1. रजिस्ट्रेशन में तेजी: विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण के लिए सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किए, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।
  2. बहुविवाह पर रोक: कानून लागू होने के बाद राज्य में बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्णतः प्रतिबंध लग गया है, जिसे महिला अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है।
  3. संपत्ति में समान अधिकार: पैतृक संपत्ति में बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में सामाजिक जागरूकता आई है।

अन्य राज्यों के लिए बना ‘रोल मॉडल’

उत्तराखंड द्वारा UCC लागू किए जाने के बाद अब देश के कई अन्य राज्य भी इसका अध्ययन कर रहे हैं।

  • अध्ययन दल का आगमन: मुख्यमंत्री ने बताया कि गुजरात, असम और राजस्थान जैसे राज्यों की समितियों ने उत्तराखंड का दौरा कर यहां के ड्राफ्ट और क्रियान्वयन प्रक्रिया को समझा है।
  • राष्ट्रीय चर्चा: धामी ने विश्वास जताया कि उत्तराखंड का यह मॉडल भविष्य में ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की दिशा में पूरे देश का मार्ग प्रशस्त करेगा।

विरोध और चुनौतियाँ: कुशलता से निपटा प्रशासन

शुरुआती दौर में कुछ धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इस कानून का विरोध किया था, लेकिन सरकार ने संवाद के माध्यम से भ्रांतियों को दूर किया।

  • नियमों में सरलता: सरकार ने जनता के फीडबैक के आधार पर नियमों को सरल बनाया ताकि आम आदमी को पंजीकरण या कानूनी प्रक्रियाओं में परेशानी न हो।
  • संस्कृति का संरक्षण: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जनजातियों (ST) को उनकी परंपराओं के सम्मान में इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, जो सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

“UCC केवल एक कानून नहीं, बल्कि देवभूमि की मातृशक्ति के सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। मुझे गर्व है कि उत्तराखंड ने इस नेक काम की शुरुआत की है।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

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