Saturday, January 31, 2026

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UCC अब आपकी अपनी भाषा में: संविधान की सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध होंगी सेवाएं; आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सुलझाएगा कानूनी उलझनें, उत्तराखंड बना ‘डिजिटल जस्टिस’ का अगुआ

देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी डिजिटल पहल की शुरुआत की है। अब UCC से संबंधित सभी नियम, कानूनी प्रावधान और नागरिक सेवाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी आधिकारिक भाषाओं में उपलब्ध करा दी गई हैं। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एकीकरण है, जो विभिन्न भाषाओं के उपयोगकर्ताओं को उनकी मातृभाषा में जटिल कानूनी शब्दावली समझने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे ‘डिजिटल सुशासन’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है, जिससे राज्य के हर नागरिक के लिए कानून की पहुंच सुलभ और पारदर्शी हो जाएगी।

AI चैटबॉट और बहुभाषी पोर्टल: कैसे करेगा काम?

तकनीकी टीम ने UCC पोर्टल को आधुनिक एआई टूल्स से लैस किया है ताकि भाषाई बाधाओं को खत्म किया जा सके:

  • बहुभाषी इंटरफेस: उपयोगकर्ता अब पोर्टल पर जाकर अपनी पसंद की भाषा (जैसे तमिल, तेलुगु, पंजाबी, बंगाली, मराठी आदि) का चुनाव कर सकते हैं। सारा डेटा तत्काल चयनित भाषा में अनुवादित हो जाएगा।
  • एआई असिस्टेंस (AI Assistance): पोर्टल पर एक ‘स्मार्ट चैटबॉट’ तैनात किया गया है। यदि कोई नागरिक किसी कानूनी धारा या नियम को नहीं समझ पा रहा है, तो वह अपनी भाषा में सवाल पूछ सकता है। एआई उसे सरल भाषा में उदाहरणों के साथ उत्तर देगा।
  • सटीक अनुवाद: सरकार ने सुनिश्चित किया है कि अनुवाद केवल शाब्दिक न होकर ‘कानूनी रूप से सटीक’ हो, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के कानूनी भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

संविधान की 22 भाषाओं का समावेश: एक भारत-श्रेष्ठ भारत

UCC के दायरे को व्यापक बनाने के लिए सरकार ने संवैधानिक ढांचे का पूरा सम्मान किया है:

  1. समावेशी पहुंच: उत्तराखंड में रहने वाले विभिन्न राज्यों के नागरिकों और प्रवासियों के लिए यह व्यवस्था वरदान साबित होगी। अब वे अपनी मूल भाषा में विवाह, पंजीकरण और उत्तराधिकार जैसे नियमों को पढ़ सकेंगे।
  2. कानूनी साक्षरता: विशेषज्ञों का मानना है कि जब कानून अपनी भाषा में उपलब्ध होता है, तो उसका पालन करना आसान हो जाता है। इससे कानूनी साक्षरता में भारी वृद्धि होगी।
  3. पारदर्शिता: सभी दस्तावेजों का डिजिटल अनुवाद होने से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और आम जनता सीधे सरकार से संवाद कर सकेगी।

UCC पंजीकरण और प्रक्रियाओं का सरलीकरण

नई डिजिटल व्यवस्था के तहत नागरिकों को कई अन्य लाभ भी मिलेंगे:

  • ऑनलाइन पंजीकरण: विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अब बहुभाषी फॉर्मों के जरिए घर बैठे किया जा सकेगा।
  • दस्तावेज़ सत्यापन: एआई टूल अपलोड किए गए दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच करेगा, जिससे आवेदन प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
  • मदद के लिए हेल्पडेस्क: पोर्टल पर वीडियो ट्यूटोरियल भी उपलब्ध कराए गए हैं, जो विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में ‘स्टेप-बाय-स्टेप’ मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

 

उत्तराखंड सरकार का यह कदम साबित करता है कि UCC केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था है। एआई और बहुभाषी सेवाओं का उपयोग न केवल उत्तराखंड के निवासियों के लिए, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल (Model) के रूप में उभरेगा। भाषाई विविधता वाले देश में कानून को उसकी मूल भावना के साथ हर घर तक पहुँचाना ही इस पहल का असली उद्देश्य है।

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