बैंकॉक। थाईलैंड की राजनीति में मंगलवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। देश की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को संवैधानिक अदालत ने पद से बर्खास्त कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रधानमंत्री का हाल ही में कंबोडिया के एक शीर्ष नेता से सीधी बातचीत करना संवैधानिक दायरे का उल्लंघन है और यह देश की संप्रभुता पर असर डालता है।
फैसले के बाद थाईलैंड की राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। शिनावात्रा, पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा की बेटी हैं और हाल ही में सत्ता में आई थीं। उन्हें सुधारवादी एजेंडे और युवाओं के समर्थन के चलते एक उभरती हुई नेता माना जा रहा था। लेकिन विपक्ष लगातार उन पर आरोप लगाता रहा कि वह विदेश नीति और संवैधानिक प्रावधानों को ताक पर रखकर फैसले ले रही हैं।
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह माना कि प्रधानमंत्री का कंबोडियाई नेता से सीधे बातचीत करना, संसद और विदेश मंत्रालय को दरकिनार करने के समान है। अदालत का मानना है कि इससे थाईलैंड के हितों को नुकसान हो सकता था।
पैतोंगतार्न शिनावात्रा ने फैसले पर निराशा जताई और कहा कि उन्होंने किसी तरह का नियम नहीं तोड़ा है। उन्होंने दावा किया कि बातचीत केवल पड़ोसी देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए थी। हालांकि, उन्होंने अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात कही।
फैसले के बाद थाईलैंड में राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बन गया है। अंतरिम प्रधानमंत्री की नियुक्ति तक सत्ता किसके हाथ में रहेगी, इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम न केवल थाईलैंड की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर डाल सकता है।
थाकसिन परिवार का थाईलैंड की राजनीति में लंबा दबदबा रहा है और पैतोंगतार्न को उनकी राजनीतिक विरासत की अगली कड़ी माना जा रहा था। ऐसे में उनकी बर्खास्तगी विपक्ष के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है।





