नई दिल्ली: शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यताओं और इससे जुड़ी विसंगतियों के खिलाफ देश भर के पच्चीस लाख शिक्षकों ने लामबंद होने का ऐलान कर दिया है। विभिन्न शिक्षक संगठनों के संयुक्त आह्वान पर, आगामी 23 से 25 फरवरी तक देश के लाखों शिक्षक अपने-अपने संस्थानों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इस आंदोलन का मुख्य केंद्र राजधानी दिल्ली होगी, जहाँ देशभर के शिक्षक अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरेंगे। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार की मौजूदा नीतियां अनुभवी शिक्षकों के हितों के खिलाफ हैं और उनके भविष्य को अनिश्चितता की ओर धकेल रही हैं।
आंदोलन की रूपरेखा: तीन दिनों तक चलेगा चरणबद्ध विरोध
शिक्षक संगठनों ने इस विरोध प्रदर्शन को व्यापक बनाने के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की है:
- प्रथम चरण (23-25 फरवरी): इन तीन दिनों के दौरान, प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर के करीब 25 लाख शिक्षक काली पट्टी बांधकर स्कूलों में जाएंगे। यह विरोध का एक शांतिपूर्ण लेकिन सशक्त तरीका होगा।
- दिल्ली कूच: फरवरी के अंतिम सप्ताह में देशभर के विभिन्न राज्यों से शिक्षक प्रतिनिधि दिल्ली पहुँचेंगे। यहाँ जंतर-मंतर या रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है, जिसके माध्यम से केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुँचाई जाएगी।
- सोशल मीडिया कैंपेन: जमीनी विरोध के साथ-साथ, शिक्षक डिजिटल मंचों पर भी अपनी मांगों को लेकर अभियान चलाएंगे ताकि वैश्विक स्तर पर उनका संदेश पहुँच सके।
विरोध का मुख्य कारण: आखिर क्यों नाराज हैं शिक्षक?
शिक्षकों की नाराजगी के पीछे कई गंभीर कारण और लंबित मांगें शामिल हैं:
- TET की अनिवार्यता पर सवाल: लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों का तर्क है कि उन पर अब TET की परीक्षा थोपना तर्कसंगत नहीं है। उनका कहना है कि दशकों के अनुभव को परीक्षा के मापदंडों से नहीं तौला जाना चाहिए।
- समान कार्य-समान वेतन: संगठनों की मांग है कि संविदा और मानदेय पर कार्यरत शिक्षकों को नियमित शिक्षकों के समान वेतन और सुविधाएं दी जाएं।
- सेवा सुरक्षा: शिक्षकों का आरोप है कि नई नीतियों के कारण उनकी नौकरी पर तलवार लटकी रहती है। वे सरकार से पूर्ण सेवा सुरक्षा और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की भी मांग कर रहे हैं।
संगठनों की चेतावनी: ‘अनदेखी की तो ठप करेंगे शिक्षा व्यवस्था’
शिक्षक महासंघ के पदाधिकारियों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है:
- निर्णायक लड़ाई: नेताओं का कहना है कि यह उनके अस्तित्व की लड़ाई है। यदि सरकार ने तीन दिवसीय सांकेतिक विरोध के बाद भी उनकी बात नहीं सुनी, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल और तालाबंदी जैसे कड़े कदम उठा सकते हैं।
- एकजुटता: इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित लगभग सभी राज्यों के शिक्षक संगठन एक मंच पर आ गए हैं।





