नई दिल्ली। तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में डीएमके नेता और पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें अंतरिम अग्रिम जमानत देते हुए अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने बालाजी को राहत देते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा। अदालत ने उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने तथा जांच में किसी भी प्रकार का व्यवधान न डालने की शर्त भी लगाई है। साथ ही अदालत ने कहा कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन हुआ तो आदेश में संशोधन या उसे रद्द किया जा सकता है।
यह मामला तमिलनाडु सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच TASMAC में दुकानों और बार के आवंटन सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। इसी मामले में सेंथिल बालाजी समेत कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट ने सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट का मानना था कि मामले की गंभीरता और सरकारी खजाने को कथित नुकसान के आरोपों को देखते हुए हिरासत में पूछताछ आवश्यक हो सकती है। इसके बाद बालाजी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत के बाद फिलहाल सेंथिल बालाजी को तत्काल गिरफ्तारी से संरक्षण मिल गया है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी रहेगी और अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई के बाद लिया जाएगा। इस मामले पर तमिलनाडु की राजनीति में भी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि TASMAC से जुड़े कथित भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर निशाना साधता रहा है।




