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Strait of Hormuz में भारतीय जहाजों को रास्ता: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कैसे मुमकिन हुई ईरान से ‘राहत’

नई दिल्ली (16 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष ने वैश्विक समुद्री व्यापार को संकट में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण कड़ा करते हुए अधिकांश देशों के लिए यह रास्ता बंद कर दिया है। हालांकि, भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत तब सामने आई जब तेहरान ने भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की विशेष अनुमति दे दी। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर अब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बड़ा खुलासा किया है।

कूटनीति का असर: जयशंकर ने बताया ‘बातचीत’ का मंत्र

प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक साक्षात्कार में विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह राहत किसी इत्तेफाक का नतीजा नहीं, बल्कि सतत कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है:

  • निरंतर संवाद की शक्ति: जयशंकर ने कहा, “अभी मैं ईरानी नेतृत्व के साथ लगातार बातचीत करने में लगा हुआ हूं। मेरा मानना है कि केवल बातचीत से ही ठोस नतीजे निकलते हैं और यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।”
  • नतीजों पर जोर: उन्होंने आगे कहा कि यदि भारत को इस बातचीत से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं और हमारे जहाजों को सुरक्षा मिल रही है, तो निश्चित रूप से यह संवाद आगे भी जारी रहेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य: क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

ईरान द्वारा इस रास्ते पर कब्जा जमाना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा था:

  1. ग्लोबल ऑयल चौकपॉइंट: दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।
  2. भारतीय ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। इस रास्ते के बंद होने से भारत में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती थी और कीमतें आसमान छू सकती थीं।
  3. ईरान का नियंत्रण: अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर इस जलमार्ग को अपने नियंत्रण में ले लिया था, जिससे वैश्विक शिपिंग लाइन्स ठप हो गई थीं।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

ईरान का भारतीय टैंकरों को रास्ता देना भारत की ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ की सफलता माना जा रहा है:

  • रणनीतिक स्वायत्तता: जहां पश्चिम एशिया के संघर्ष में कई देश गुटबाजी का शिकार हैं, वहीं भारत ने ईरान और इजरायल दोनों के साथ अपने संबंधों का संतुलन बनाए रखा है।
  • सप्लाई चेन की मजबूती: इस विशेष अनुमति से भारतीय तेल कंपनियों को राहत मिलेगी और देश में ईंधन का स्टॉक सुरक्षित रहेगा।

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