वाशिंगटन/तेहरान (16 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा माने जाने वाले Strait of Hormuz पर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा इस समुद्री मार्ग पर लगाए गए प्रतिबंधों और जहाजों को रोकने की धमकियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अख्तियार किया है। ट्रंप ने इसे ‘अपना इलाका’ (प्रभाव क्षेत्र) करार देते हुए दुनिया के सात प्रमुख मित्र देशों से इस मार्ग को सुरक्षित करने के लिए अपने नौसैनिक जहाज भेजने की आधिकारिक गुजारिश की है।
डोनाल्ड ट्रंप की अपील: वैश्विक ऊर्जा बाजार को बचाने की कवायद
राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह करते हुए इस समुद्री गलियारे की सुरक्षा को अनिवार्य बताया है:
- सात देशों से मदद की मांग: ट्रंप प्रशासन ने अपने सात रणनीतिक साझेदार देशों से अपील की है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त करने और वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अपनी नौसेना तैनात करें।
- सख्त संदेश: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस मार्ग पर ईरान की मनमानी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए खुला रहना चाहिए और इसे सुरक्षित करना सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
- ऊर्जा संकट का डर: ईरान की घेराबंदी के कारण वैश्विक तेल बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है, जिसे दूर करने के लिए अमेरिका अब सैन्य लामबंदी की तैयारी कर रहा है।
यह समुद्री रास्ता भौगोलिक रूप से छोटा हो सकता है, लेकिन इसका आर्थिक महत्व विशाल है:
- तेल का महामार्ग: दुनिया भर में होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) इसी संकरे जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
- सप्लाई चेन पर संकट: यदि ईरान इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर देता है, तो खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल दुनिया के बाजारों तक नहीं पहुंच पाएगा, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है।
- ईरान की आक्रामकता: इजरायल और अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने इस रास्ते पर अपनी मिसाइलें और नौसैनिक ड्रोन तैनात कर दिए हैं, जिससे हर गुजरने वाले टैंकर पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है।
ईरान की जवाबी चेतावनी
ट्रंप की इस अपील के बाद तेहरान ने भी तेवर कड़े कर लिए हैं:
- ईरान के सैन्य कमांडरों ने कहा है कि यदि विदेशी नौसेनाएं इस क्षेत्र में दखल देती हैं, तो वे इसे ‘सीधे युद्ध का निमंत्रण’ मानेंगे।
- ईरान का दावा है कि होर्मुज की सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ेगी।





