नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने कहा कि SIR और तकनीक से जुड़े सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और पूर्ण सहमति से लिए गए हैं। आयोग ने कहा कि किसी संस्था में विचार-विमर्श, सुझाव और अलग-अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
फॉर्म-6 के घोषणा पत्र पर भी स्थिति साफ
आयोग ने बताया कि SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ लगाए जाने वाले घोषणा पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने वैध और उचित माना है। साथ ही, SIR के तहत नोटिस पाने वाले लोगों को सामान्यतः व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल असाधारण परिस्थितियों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है।
छूटे मतदाताओं के नाम जोड़ने के निर्देश
आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यदि इस दौरान किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में छूट गया है या कोई नया मतदाता पहली बार पंजीकरण कराना चाहता है, तो वह संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के पास आवेदन कर सकता है। आयोग ने CEO, DEO और ERO को ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
गोवा में छूटे मतदाताओं के लिए बूथ स्तर के अधिकारियों को घर-घर जाकर फॉर्म उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग के अनुसार, 97 में से 81 लोगों ने फॉर्म-6 भर दिया है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी समय-सीमा
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है, जबकि इनके निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर और उनके निपटारे की समय-सीमा 10 नवंबर 2026 कर दी गई है।




