बिश्केक। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के संस्कृति मंत्रियों की बैठक में भारत ने अपनी साझा सभ्यतागत विरासत को क्षेत्रीय सहयोग की मजबूत कड़ी बताते हुए सांस्कृतिक संबंधों को और व्यापक बनाने का आह्वान किया। भारत ने कहा कि संस्कृति संवाद, विश्वास और सतत विकास को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम है।
बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। उन्होंने एससीओ देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों, परंपराओं और ऐतिहासिक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि साझा विरासत देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत ने बैठक के दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विरासत संरक्षण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया। भारतीय पक्ष ने कहा कि एससीओ सदस्य देशों के बीच कला, साहित्य, संग्रहालयों, पुरातात्विक धरोहरों और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने भारत की प्राचीन सोच ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए सहयोग का आधार भी है। उन्होंने साझा सांस्कृतिक मूल्यों के माध्यम से क्षेत्र में शांति, विश्वास और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की बात कही।
एससीओ के सदस्य देशों के बीच बौद्ध विरासत, ऐतिहासिक मार्गों और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर पहले भी कई पहल की गई हैं। भारत ने साझा बौद्ध विरासत के संरक्षण और प्रचार के लिए डिजिटल प्रदर्शनी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन पर भी जोर दिया है।
बैठक में सदस्य देशों ने संस्कृति को आपसी संबंधों को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में स्वीकार किया। भारत ने कहा कि सांस्कृतिक सहयोग से न केवल ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि भविष्य में पर्यटन, शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्रों में भी साझेदारी के नए अवसर खुलेंगे।
एससीओ संस्कृति मंत्रियों की बैठक ऐसे समय में हुई है जब संगठन अपने सदस्य देशों के बीच बहुआयामी सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। भारत ने सांस्कृतिक कूटनीति के जरिए क्षेत्रीय एकजुटता और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।





