Top 5 This Week

Related Posts

RBI मौद्रिक नीति समीक्षा: कल होगा रेपो रेट पर बड़ा फैसला; क्या मिलेगी कम EMI की राहत या अभी और करना होगा इंतजार?

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक का कल, 9 अप्रैल को समापन होने जा रहा है। नए वित्त वर्ष (2026-27) की इस पहली द्वैमासिक नीतिगत समीक्षा के परिणामों की घोषणा गवर्नर शक्तिकांत दास कल सुबह करेंगे। इस समय पूरे देश की नजरें आरबीआई के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह निर्णय सीधे तौर पर आम आदमी की जेब और बैंकों से लिए गए लोन की ईएमआई (EMI) को प्रभावित करने वाला है।

महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता के बीच बड़ी चुनौती

आरबीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती घरेलू महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना है।

  • मुद्रास्फीति का दबाव: हालांकि पिछले कुछ समय में खुदरा महंगाई में मामूली कमी देखी गई है, लेकिन खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।
  • मिडिल ईस्ट संकट का साया: अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता पैदा की है। जानकारों का मानना है कि आरबीआई इन वैश्विक संकेतों को ध्यान में रखते हुए ही कोई कदम उठाएगा।

क्या घटेगी आपकी EMI?

करोड़ों कर्जधारकों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक इस बार रेपो रेट में कटौती कर सकता है, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सस्ते हो सकें।

  • विशेषज्ञों की राय: अधिकांश बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई फिलहाल ‘रुको और देखो’ (Wait and Watch) की नीति अपना सकता है। संभावना है कि रेपो रेट को 6.50% पर स्थिर रखा जाए।
  • विकास दर पर ध्यान: यदि आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखता है, तो इसका मतलब होगा कि वह अभी भी महंगाई को पूरी तरह काबू में करने के लिए सतर्क है। हालांकि, रेपो रेट में कटौती का सीधा फायदा नई ईएमआई शुरू करने वालों और फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों को मिलेगा।

नए वित्त वर्ष का रोडमैप

कल होने वाला ऐलान केवल ब्याज दरों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि गवर्नर शक्तिकांत दास आगामी वर्ष के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था का रोडमैप भी पेश करेंगे।

  • GDP अनुमान: बैठक के बाद आरबीआई चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (GDP) विकास दर के अपने अनुमानों को भी अपडेट कर सकता है।
  • तरलता (Liquidity) प्रबंधन: बैंकिंग प्रणाली में नकदी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक कुछ नए उपायों की घोषणा कर सकता है।

Popular Articles