पहलगाम हमले के बाद भारत ने जब पाकिस्तान और पीओके में स्थित आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत कार्रवाई की थी, उसके बाद पाकिस्तान बौखला गया था और फिर उसने भारत पर ड्रोन्स और मिसाइल के जरिए हमला करने की कोशिश की थी।
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान दो ऐसे देश भी दुनिया के सामने एक्सपोज हो गए, जिसने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया। तुर्किये और अजरबैजान का असली चेहरा दुनिया के सामने आ चुका है। दरअसल, पाकिस्तान ने भारत पर जो ड्रोन दागे थे, उनमें से कुछ ‘मेड इन तुर्किये’ के भी थे।
पाकिस्तान ने तुर्किये के जिन ड्रोन्स का इस्तेमाल भारत पर किया था उसे भारतीय डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया और उनके अवशेष नई दिल्ली के पास मौजूद है। तुर्किये अब इन सबूतों को नकार नहीं सकता है।
तुर्किये और अजरबैजान की इस नीयत का अब देशभर में कड़ा विरोध हो रहा है और आम लोगों के साथ-साथ बड़े नेताओं ने भी दोनों देशों का विरोध किया है। इसी कड़ी में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी एक्स पर पोस्ट कर विरोध जताया है।
उन्होंने लिखा, ” तुर्किये और अजरबैजान हम भारतीय को जाना बंद कर देना चाहिए। पाकिस्तान के किसी भी समर्थक देश के साथ कोई रिश्ता नहीं, दुश्मन का दोस्त दुश्मन।”
न सिर्फ भाजपा सांसद, बल्कि देश के अंदर से भी तुर्किये के प्रोडक्ट्स और अजरबैजान के सामानों को बॉयकॉट करने की मांग उठ रही है। कई लोगों ने तुर्किये जाने के टिकट भी कैंसिल किए हैं और लोगों से ये दोनों देश न जाने की अपील भी की है। आईए जानते हैं भारत तुर्किये और अजरबैजान से क्या-क्या व्यापार करता है…
अप्रैल-फरवरी 2024-25 के दौरान तुर्किये को भारत का निर्यात 5.2 बिलियन अमेरीकी डॉलर रहा, जबकि 2023-24 में यह 6.65 बिलियन अमरीकी डॉलर था। यह भारत के कुल 437 बिलियन अमरीकी डॉलर के निर्यात का सिर्फ 1.5 प्रतिशत है।
अप्रैल-फरवरी 2024-25 के दौरान अजरबैजान को भारत का निर्यात केवल 86.07 मिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जबकि 2023-24 में यह 89.67 मिलियन अमरीकी डॉलर था। यह भारत के कुल निर्यात का मात्र 0.02 प्रतिशत है।
अप्रैल-फरवरी 2024-25 के दौरान तुर्किये से भारत का आयात 2.84 बिलियन अमरीकी डॉलर था, जबकि 2023-24 में यह 3.78 बिलियन अमरीकी डॉलर था। यह भारत के कुल 720 बिलियन अमरीकी डॉलर के आयात का केवल 0.5 प्रतिशत है।
अप्रैल-फरवरी 2024-25 के दौरान अजरबैजान से आयात 1.93 मिलियन अमरीकी डॉलर था, जबकि 2023-24 में यह 0.74 मिलियन अमरीकी डॉलर था। यह भारत के कुल आवक शिपमेंट का मात्र 0.0002 प्रतिशत है।





