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Nobel Peace Prize 2025: कल होगा विजेता का ऐलान, ट्रंप के साथ कौन हैं प्रमुख दावेदार?

ओस्लो/नई दिल्ली, 9 अक्टूबर।
2025 के नोबेल शांति पुरस्कार का नामकलाप कल दोपहर 2:30 बजे (भारतीय समयानुसार) ओस्लो में घोषित किया जाएगा। दुनिया भर में इस बात को लेकर उत्सुकता बढ़ी हुई है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बार पुरस्कार हासिल करेंगे या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में पीछे रह गए हैं।

 

ट्रम्प और शांति प्रयासों का विवाद

अपने कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने आठ बड़े संघर्षों को समाप्त कराने का दावा किया और भारत-पाकिस्तान विवाद सहित कई वैश्विक संघर्षों को सुलझाने का श्रेय लिया। उन्होंने हजारों बार इन सफलताओं का दावा किया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की पहलों में स्थायी शांति स्थापित करने का ठोस प्रमाण नहीं है। स्वीडन के अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रो. पीटर वॉलेनस्टीन ने कहा कि इस साल ट्रंप को पुरस्कार नहीं मिलेगा, हालांकि भविष्य में उनकी पहल पर यह विचार किया जा सकता है।

 

कौन हैं इस बार प्रमुख दावेदार?

इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 338 व्यक्ति और संगठन नामांकित हैं। हालांकि, नामों की आधिकारिक सूची 50 साल तक गोपनीय रखी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस साल विजेता का चयन चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि वैश्विक संघर्षों की स्थिति बेहद गंभीर है। इस्राइल और ईरान के बीच तनाव, गाजा संकट, भारत-पाकिस्तान के बीच ड्रोन और मिसाइल हमले, थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद जैसे घटनाओं ने माहौल को संवेदनशील बना दिया है।

प्रमुख संभावित दावेदारों में शामिल हैं:

  • सूडान की इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स: युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा और जीवन बचाने में सक्रिय।
  • एलेक्सी नवलनी और यूलिया नवलनाया: रूस के विपक्षी नेता और उनकी विधवा, जो लोकतंत्र और मानवाधिकार की रक्षा में योगदान दे रहे हैं।
  • ODIHR (Office for Democratic Institutions and Human Rights): लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव निगरानी में सक्रिय।
  • संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाएं: यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, यूएनएचसीआर, यूएनआरडब्ल्यूए।
  • वैश्विक न्याय और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े संगठन: इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट, इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स, रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स।

 

विशेषज्ञों की राय और संभावित संदेश

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार नोबेल समिति वैश्विक स्थिरता और न्याय की दिशा में कोई संदेश देना चाह सकती है। ऐसे में उन नेताओं या संस्थाओं को प्राथमिकता मिल सकती है, जो विश्व व्यवस्था की रक्षा में योगदान दे रहे हैं।

इतिहास में कई बार नोबेल समिति ने आश्चर्यजनक और अप्रत्याशित विजेताओं को सम्मानित किया है। इसलिए इस साल भी किसी चौंकाने वाले नाम की संभावना बनी हुई है।

 

सार्वभौमिक रूप से यह तय माना जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप इस बार विजेता नहीं होंगे, भले ही उन्होंने खुद को शांति का मसीहा बताया हो। वहीं, वैश्विक संघर्षों और मानवीय संकटों के बीच इस साल नोबेल शांति पुरस्कार का विजेता कौन होगा, इसका खुलासा कल होगा।

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