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NCERT विजन 2047: विज्ञान की पढ़ाई होगी प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट आधारित, रटने पर लगेगा जोरदार ब्रेक

नई दिल्ली। बदलती तकनीक और तेजी से हो रहे वैज्ञानिक शोधों के बीच स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई के तरीके में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने विज्ञान शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, शोधपरक और प्रोजेक्ट आधारित बनाने की दिशा में पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल समीकरण और परिभाषाएं याद कराने के बजाय प्रयोग और गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान समझाना है।

2047 के लक्ष्य के अनुरूप तैयार होगा नया दृष्टिकोण

NCERT इस बदलाव को लेकर 28 से 30 दिसंबर के बीच कर्नाटक के मैसूरु में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेगा। इसमें देशभर से विज्ञान शिक्षक, वैज्ञानिक और पाठ्यक्रम तैयार करने वाले विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन में विज्ञान शिक्षा को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप तैयार करने पर मंथन होगा।

पुराने विषयों की जगह नए शोध और नवाचार

नई व्यवस्था में ऐसे विषयों और अवधारणाओं को प्राथमिकता देने की तैयारी है, जो भविष्य की जरूरतों से जुड़े हों। पाठ्यक्रम में स्वदेशी विज्ञान, प्राचीन गणित, खगोल विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और ग्रीन केमिस्ट्री जैसे विषयों को शामिल करने पर चर्चा होगी। साथ ही पुराने और बदल चुके वैज्ञानिक तथ्यों को भी नए शोध के अनुरूप अपडेट किया जाएगा।

शिक्षकों को भी मिलेगा प्रशिक्षण

सम्मेलन में विज्ञान पढ़ाने के नए तरीकों और तकनीकों पर चर्चा के साथ शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी जोर रहेगा। प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग, नई टीचिंग-लर्निंग तकनीक और नए विज्ञान पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा। इसमें उद्योग जगत, नीति निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ भी हिस्सा लेंगे।

शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में विभिन्न स्कूली बोर्डों से करीब 61 लाख विद्यार्थी विज्ञान स्ट्रीम से कक्षा 12वीं में पास हुए, जबकि 2013 में यह संख्या लगभग 36 लाख थी। ऐसे में विज्ञान शिक्षा को आधुनिक और रोजगार व शोध की जरूरतों के अनुरूप बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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