नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से संबंधित विवादित सामग्री को लेकर चल रही स्वत: संज्ञान कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बंद कर दिया। अदालत को बताया गया कि विवादित अध्याय को पाठ्यपुस्तक से हटा दिया गया है और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर नया अध्याय शामिल किया गया है।
मामला कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब Exploring Society: India and Beyond के अध्याय-4 से जुड़ा था। इसमें ‘The Role of the Judiciary in our Society’ शीर्षक के तहत ‘Corruption in the Judiciary’ यानी न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर सामग्री शामिल की गई थी। इस सामग्री पर सवाल उठने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में मामले का स्वत: संज्ञान लिया था।
विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर हुआ बदलाव
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने NCERT और शिक्षा मंत्रालय की ओर से दाखिल हलफनामों का संज्ञान लिया। अदालत को बताया गया कि विवादित अध्याय को हटा दिया गया है और विशेषज्ञ समिति द्वारा सुझाए गए बदलावों के आधार पर नया अध्याय तैयार किया गया है। संशोधित पाठ्यपुस्तकें अब विद्यार्थियों के बीच वितरित की जा रही हैं।
पहले कोर्ट ने जताई थी आपत्ति
फरवरी में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने किताब में न्यायपालिका के बारे में की गई टिप्पणियों पर गंभीर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका की भूमिका और उसके योगदान का संतुलित चित्रण होना चाहिए। साथ ही, नए अध्याय को विशेषज्ञों की मंजूरी के बाद ही प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया था।
विवादित सामग्री हटाए जाने और संशोधित पाठ्यपुस्तकों के जारी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी।





