नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों में हाल ही में सामने आई विसंगतियों और विवादित अंशों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा संज्ञान लिया है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने शिक्षा मंत्रालय और NCERT के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में पाठ्यसामग्री की गुणवत्ता और तथ्यों की प्रस्तुति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता और ऐतिहासिक तथ्यों की सटीकता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस मामले में अब जवाबदेही तय करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद माना जा रहा है कि सामग्री तैयार करने वाले पैनल और संबंधित अधिकारियों पर बड़ी गाज गिर सकती है।
क्यों नाराज हैं प्रधानमंत्री?
प्रधानमंत्री की नाराजगी के पीछे मुख्य रूप से पाठ्यपुस्तकों में तथ्यों की अनदेखी और कुछ संवेदनशील विषयों की विवादास्पद व्याख्या बताई जा रही है:
- तथ्यों की सटीकता: कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नई और संशोधित पुस्तकों में कुछ ऐतिहासिक संदर्भों और महत्वपूर्ण आंकड़ों में त्रुटियां पाई गई हैं।
- देरी और गुणवत्ता: सत्र शुरू होने के बावजूद कुछ कक्षाओं के लिए सामग्री के चयन और वितरण में हुई देरी ने भी सरकार की चिंता बढ़ाई है।
- संवेदनशीलता का अभाव: पीएमओ का मानना है कि पाठ्यसामग्री तैयार करते समय राष्ट्रीय गौरव और संवैधानिक मूल्यों का सही संतुलन बनाए रखने में चूक हुई है।
जवाबदेही के निर्देश: तय होगी जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री के कड़े रुख के बाद शिक्षा मंत्रालय अब एक्शन मोड में है। बैठक के दौरान निम्नलिखित सख्त निर्देश जारी किए गए हैं:
- गहन जांच के आदेश: एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा जो विवादित अंशों की समीक्षा करेगी और यह पता लगाएगी कि ये गलतियां किस स्तर पर हुईं।
- दोषियों पर कार्रवाई: सामग्री के चयन, संपादन और उसे अंतिम मंजूरी देने वाले विशेषज्ञों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसमें ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने को कहा गया है।
- सिस्टम में सुधार: भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए पाठ्यसामग्री तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और बहु-स्तरीय बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा मंत्रालय में मची खलबली
प्रधानमंत्री की फटकार के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मंत्रालय अब उन सभी पैनलों की सूची तैयार कर रहा है जिन्होंने पिछले दो वर्षों में पाठ्यक्रम संशोधन (Rationalization) का काम किया है।
- विशेषज्ञों की भूमिका की जांच: यह देखा जा रहा है कि क्या सामग्री में किए गए बदलावों के पीछे किसी विशेष विचारधारा या लापरवाही का हाथ था।
- अधिकारियों की छुट्टी संभव: माना जा रहा है कि NCERT के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटाया जा सकता है या उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है।





