नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की राजनीति विज्ञान की किताबों में ‘न्यायपालिका’ को लेकर लिखे गए कुछ अंशों पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, पाठ्यक्रम में शामिल उस हिस्से को हटाने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें न्यायपालिका के भीतर ‘भ्रष्टाचार’ और ‘अदालतों की खामियों’ का जिक्र किया गया है। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने भी इन अंशों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका जैसे संवैधानिक स्तंभ के प्रति छात्रों में नकारात्मक धारणा बनाना उचित नहीं है।
विवाद की जड़: क्या लिखा है किताबों में?
NCERT की कक्षा 11 और 12 की कुछ किताबों में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी की गई थी:
- भ्रष्टाचार का उल्लेख: किताबों में एक अध्याय के दौरान यह बताया गया था कि निचली अदालतों से लेकर उच्च स्तर तक भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं।
- अक्षम कार्यप्रणाली: न्यायपालिका की खामियों और फैसलों में होने वाली अत्यधिक देरी को लेकर भी कुछ आलोचनात्मक पैराग्राफ शामिल थे।
- संशोधन का प्रस्ताव: शिक्षा मंत्रालय और NCERT के विशेषज्ञों की समिति का मानना है कि स्कूल स्तर के छात्रों के लिए यह सामग्री ‘असंतुलित’ और ‘अनावश्यक’ हो सकती है।
CJI की आपत्ति: संवैधानिक संस्था के सम्मान का सवाल
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मामले पर अपनी राय रखते हुए महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं:
- संस्थागत साख: CJI ने जोर दिया कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को लोकतंत्र की नींव और संस्थानों के महत्व को समझाना है। न्यायपालिका के बारे में केवल नकारात्मक पहलुओं को उजागर करना छात्रों के मन में संस्थान की छवि बिगाड़ सकता है।
- तथ्यात्मक संतुलन: उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कमियों का जिक्र किया भी जाता है, तो उसे न्यायपालिका द्वारा किए गए सुधारों और ऐतिहासिक फैसलों के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।
- युवा मस्तिष्क पर प्रभाव: CJI का मानना है कि स्कूली बच्चों को पहले न्यायपालिका की शक्तियों और अधिकारों के बारे में सीखना चाहिए, न कि सीधे उसकी आंतरिक समस्याओं के बारे में।
NCERT का पक्ष और आगामी कदम
विवाद के बीच NCERT ने अपनी सफाई पेश की है और भविष्य की रणनीति साझा की है:
- पाठ्यक्रम का युक्तिकरण (Rationalization): परिषद का कहना है कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत किताबों को अपडेट कर रहे हैं ताकि छात्रों पर बोझ कम हो और सामग्री समकालीन रहे।
- विशेषज्ञों की राय: इस हिस्से को हटाने या बदलने का अंतिम निर्णय शिक्षाविदों और न्यायविदों की एक उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
- नई किताबें: उम्मीद है कि अगले शैक्षणिक सत्र (2026-27) से जो नई किताबें आएंगी, उनमें इन विवादित अंशों को संशोधित कर दिया जाएगा।





