नई दिल्ली/जेनेवा: वैश्विक स्वास्थ्य जगत में चिंता का विषय बने मंकीपॉक्स (Mpox) के नए वेरिएंट को लेकर एक नई रिसर्च ने सबको चौंका दिया है। हालिया स्टडी के आंकड़ों के अनुसार, मंकीपॉक्स से संक्रमित पाए गए हर 10 में से 9 व्यक्तियों ने हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा की थी। यह खुलासा इस बात की पुष्टि करता है कि वायरस का नया और अधिक संक्रामक स्वरूप ‘वैश्विक यात्रा नेटवर्क’ के जरिए तेजी से एक देश से दूसरे देश में फैल रहा है। स्वास्थ्य वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अध्ययन भविष्य में एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग और अंतरराष्ट्रीय सीमा नियंत्रण के नियमों को और कड़ा करने की दिशा में एक बड़ा आधार साबित हो सकता है।
स्टडी के मुख्य निष्कर्ष: यात्रा और संक्रमण का सीधा संबंध
शोधकर्ताओं ने संक्रमितों के डेटा का विश्लेषण करने के बाद कुछ महत्वपूर्ण बिंदु रेखांकित किए हैं:
- 90% मरीजों का ट्रैवल रिकॉर्ड: विश्लेषण में पाया गया कि संक्रमण का शिकार हुए 90 प्रतिशत लोग या तो स्वयं विदेश से लौटे थे या वे किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए थे जिसने हाल ही में यात्रा की थी।
- नए वेरिएंट की गंभीरता: वैज्ञानिकों के अनुसार, यह नया वेरिएंट पिछले स्वरूपों की तुलना में अधिक तेजी से म्यूटेट (Mutate) हो रहा है और इसकी संक्रमण दर (Transmission Rate) भी काफी ऊँची है।
- साइलेंट स्प्रेडर: अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई है कि कई यात्री लक्षण दिखाई देने से पहले ही वायरस के वाहक बन रहे हैं, जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है।
Mpox वायरस: शरीर पर प्रभाव और लक्षण
Mpox वायरस शरीर के विभिन्न अंगों और त्वचा को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसके प्रसार और लक्षणों को समझने के लिए नीचे दिए गए विवरण को देखें:
- त्वचा पर चकत्ते: सबसे प्रमुख लक्षण चेहरे, हाथों और पैरों पर दर्दनाक दानों या छालों का निकलना है।
- तेज बुखार और थकान: संक्रमण की शुरुआत अक्सर तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक कमजोरी से होती है।
- लिम्फ नोड्स में सूजन: अन्य वायरल रोगों के विपरीत, इसमें लिम्फ नोड्स (ग्रंथियों) में सूजन आ जाती है, जो इसे चेचक से अलग करती है।
वैश्विक अलर्ट और बचाव के उपाय
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों ने नई गाइडलाइन्स पर विचार करना शुरू कर दिया है:
- कड़ी स्क्रीनिंग: एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग और लक्षणों की जांच को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
- निगरानी और क्वारंटाइन: संक्रमित देशों से लौटने वाले यात्रियों को खुद की सेहत की कम से कम 21 दिनों तक निगरानी करने की सलाह दी गई है।
- टीकाकरण अभियान: प्रभावित क्षेत्रों और हाई-रिस्क ग्रुप के लिए वैक्सीन (Vaccination) की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
निष्कर्ष: सतर्कता ही सुरक्षा
यह स्टडी स्पष्ट करती है कि Mpox अब केवल एक स्थानीय स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय चुनौती बन चुका है। ’10 में से 9′ का यह आंकड़ा बताता है कि यदि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही बरती गई, तो यह एक नई वैश्विक महामारी का रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनता को घबराने के बजाय जागरूक रहने और किसी भी संदिग्ध लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की आवश्यकता है।





