नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात एक बार फिर भारी हिंसा और बवाल देखने को मिला। जेएनयू कुलगुरु (VC) शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठनों (Left Wing) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। कैंपस में आधी रात को हुई इस हिंसक झड़प में लाठी-डंडों और पत्थरों का खुलकर इस्तेमाल किया गया, जिसमें दोनों पक्षों के कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को तत्काल एम्स (AIIMS) और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
विवाद की जड़: कुलगुरु के इस्तीफे की मांग बीते कई दिनों से जेएनयू में प्रशासनिक निर्णयों और कैंपस सुविधाओं को लेकर छात्र संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे थे:
- प्रशासन के खिलाफ मोर्चा: वामपंथी संगठनों का आरोप है कि कुलगुरु के नेतृत्व में विश्वविद्यालय का लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर हो रहा है और छात्रों की मांगों की अनदेखी की जा रही है।
- प्रदर्शन का मोड़: रविवार रात जब छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक ब्लॉक के पास एकत्र हुए, तो वहां मौजूद अन्य गुट के साथ उनकी कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में बदल गई।
आधी रात का मंजर: कैंपस बना अखाड़ा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात करीब 12 बजे के बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया:
- लाठी-डंडों से हमला: दोनों गुटों के छात्र हाथों में डंडे लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े। अंधेरे का फायदा उठाते हुए जमकर पत्थरबाजी भी हुई।
- लहूलुहान हुए छात्र: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में कई छात्रों के सिर से खून बहता और कपड़े फटे हुए देखे जा सकते हैं। घायलों में छात्र संघ के कुछ पदाधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
- तोड़फोड़: हिंसा के दौरान विश्वविद्यालय की संपत्ति और कैंटीन के पास रखे फर्नीचर को भी नुकसान पहुँचाया गया।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगाया है:
- लेफ्ट विंग का दावा: वामपंथी संगठनों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से वीसी का इस्तीफा मांग रहे थे, तभी ABVP के बाहरी तत्वों ने उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया।
- ABVP का पलटवार: वहीं, ABVP का आरोप है कि लेफ्ट के कार्यकर्ताओं ने आम छात्रों को डराने-धमकाने की कोशिश की और जब विरोध किया गया तो उन्होंने हिंसा का सहारा लिया। उनका दावा है कि ‘कुलगुरु के इस्तीफे’ की आड़ में कैंपस का माहौल खराब करने की साजिश रची जा रही है।
पुलिस की तैनाती और कैंपस में सन्नाटा देर रात सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस की भारी टुकड़ी जेएनयू गेट पर पहुँच गई। हालांकि, नियमों के अनुसार पुलिस विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बिना भीतर दाखिल नहीं हुई, लेकिन मुख्य द्वारों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कैंपस के भीतर फिलहाल सन्नाटा है, लेकिन तनाव बरकरार है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है और घटना की जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित करने का आश्वासन दिया है।





