रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की में वैश्विक स्वास्थ्य और सतत विकास के लक्ष्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में दुनिया भर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं ने शिरकत की, जिसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक युग में स्वास्थ्य क्षेत्र में आ रही जटिल चुनौतियों और उनके तकनीकी समाधानों पर विचार-विमर्श करना था।
अत्याधुनिक तकनीक और स्वास्थ्य का समन्वय
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स भविष्य की चिकित्सा प्रणाली का आधार बनेंगे। वक्ताओं ने कहा कि बदलती जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों के कारण उभरती नई बीमारियों से निपटने के लिए नवाचार (Innovation) और तकनीकी विकास अनिवार्य है।
प्रमुख चर्चा के बिंदु
सम्मेलन में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर सत्र आयोजित किए गए:
- सतत विकास लक्ष्य (SDGs): संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में विज्ञान की भूमिका।
- सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं: विकासशील देशों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए नवीन मॉडलों पर चर्चा।
- महामारी की तैयारी: भविष्य में संभावित स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए एक मजबूत वैश्विक बुनियादी ढांचे का निर्माण।
- पर्यावरण और स्वास्थ्य: जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर पड़ता प्रतिकूल प्रभाव और उसके निवारण के उपाय।
शोध और सहयोग पर जोर
IIT रुड़की के निदेशक ने अपने संबोधन में कहा कि संस्थान हमेशा से ही समाजोपयोगी शोध को प्राथमिकता देता रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन से निकले निष्कर्ष और शोध पत्र वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य नीतियों को नया आकार देने में सहायक होंगे। सम्मेलन के दौरान विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ MoU (सहमति पत्र) पर भी विचार किया गया ताकि संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा मिल सके।
स्थानीय और वैश्विक प्रभाव
इस आयोजन ने न केवल शोधार्थियों को एक मंच प्रदान किया, बल्कि उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुधार के लिए भी तकनीकी इनपुट साझा किए। सम्मेलन के अंत में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे संबंधित मंत्रालयों और वैश्विक निकायों को भविष्य की रणनीतियों के लिए भेजा जाएगा।





