नई दिल्ली/जोधपुर:भारतीय वायुसेना (IAF) के बेड़े में शामिल स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ (LCA Tejas) को लेकर एक बड़ी चिंताजनक खबर सामने आई है। एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान तेजस विमान का ब्रेक फेल हो गया, जिसके चलते लैंडिंग के समय विमान रनवे की सीमा को पार कर आगे निकल गया। गनीमत यह रही कि इस घटना में पायलट पूरी तरह सुरक्षित है और विमान को भी कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुँचा है। हालांकि, सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वायुसेना मुख्यालय ने तत्काल प्रभाव से बेड़े के सभी 30 तेजस विमानों को ‘ग्राउंड’ (उड़ान पर रोक) कर दिया है।
कैसे हुआ हादसा?
यह घटना उस समय हुई जब तेजस विमान अपनी सॉर्टी (प्रशिक्षण उड़ान) पूरी कर एयरबेस पर वापस लौट रहा था:
- लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी: प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जैसे ही विमान ने रनवे को छुआ, पायलट ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया।
- रनवे से फिसला विमान: ब्रेक न लगने के कारण विमान की गति कम नहीं हो पाई और वह रनवे के छोर को पार करते हुए कच्ची जमीन पर जा रुका।
- पायलट की सूझबूझ: पायलट ने अत्यंत संयम का परिचय देते हुए विमान को पलटने या किसी बड़ी टक्कर से बचा लिया।
IAF ने क्यों उठाए इतने सख्त कदम?
वायुसेना ने सुरक्षा मानकों (Safety Protocols) का पालन करते हुए बेड़े के सभी विमानों की जांच के आदेश दिए हैं:
- सुरक्षा ऑडिट: जब तक तकनीकी टीम इस खराबी के मूल कारण (Root Cause) का पता नहीं लगा लेती, तब तक कोई भी तेजस विमान उड़ान नहीं भरेगा।
- ब्रेकिंग सिस्टम की जांच: विशेष रूप से विमान के हाइड्रोलिक और मैकेनिकल ब्रेकिंग सिस्टम की गहन जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह समस्या अन्य विमानों में तो नहीं है।
- HAL के साथ समन्वय: वायुसेना की तकनीकी टीम विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ($HAL$) के इंजीनियरों के साथ मिलकर इस तकनीकी खामी का विश्लेषण कर रही है।
स्वदेशी लड़ाकू विमान की साख पर सवाल?
तेजस को भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का गौरव माना जाता है। इस घटना ने विशेषज्ञों के बीच चर्चा छेड़ दी है:
- सुरक्षा रिकॉर्ड: तेजस का अब तक का सुरक्षा रिकॉर्ड काफी बेहतर रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय में आई तकनीकी दिक्कतों ने रखरखाव (Maintenance) पर सवाल खड़े किए हैं।
- भविष्य के ऑर्डर पर असर: भारतीय वायुसेना $83$ नए तेजस $Mk-1A$ विमानों को शामिल करने की प्रक्रिया में है। ऐसे में वर्तमान बेड़े का ग्राउंड होना आपूर्ति और परिचालन की तैयारी (Operational Readiness) को प्रभावित कर सकता है।





