नई दिल्ली। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भ्रामक दावों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रमुख पेय पदार्थ कंपनियों को अपने उत्पादों से ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द और उससे जुड़े भ्रामक दावे हटाने के लिए 90 दिनों का समय दिया है। नियामक का कहना है कि भारत में ‘एनर्जी ड्रिंक’ श्रेणी के लिए कोई स्वीकृत खाद्य मानक अधिसूचित नहीं है, इसलिए इस तरह की ब्रांडिंग उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है।
एफएसएसएआई ने इससे पहले 1 जुलाई को छह प्रमुख कंपनियों को मिसब्रांडिंग और भ्रामक प्रचार के आरोप में नोटिस जारी किए थे। इनमें रेड बुल, पेप्सिको की एड्रेनालिन रश, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कैंपा एनर्जी गोल्ड बूस्ट, स्टिंग, हेल एनर्जी और मॉन्स्टर एनर्जी जैसे उत्पाद शामिल हैं। नियामक ने स्पष्ट किया कि उत्पादों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ जैसे शब्दों का उपयोग और ऊर्जा बढ़ाने या शरीर को सक्रिय करने जैसे दावे मौजूदा नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार, इंडियन बेवरेज एसोसिएशन (IBA) के प्रतिनिधियों ने हाल ही में एफएसएसएआई अधिकारियों के साथ बैठक कर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी। हालांकि, नियामक ने किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया। कंपनियों की मांग पर केवल नई पैकेजिंग तैयार करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया है।
एफएसएसएआई ने यह भी दोहराया कि खाद्य उत्पादों के लिए ‘वाइटलाइज बॉडी एंड माइंड’, ‘एनर्जी लेवल बढ़ाता है’, ‘फोकस बेहतर करता है’ या ‘सामान्य कमजोरी दूर करता है’ जैसे कार्यात्मक या चिकित्सीय दावों की अनुमति नहीं है, जब तक उनके लिए निर्धारित मानक और वैज्ञानिक आधार उपलब्ध न हों।
नियामक के इस कदम को उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि कंपनियां तय समय में निर्देशों का पालन नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।





