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FCRA संशोधन विधेयक पर 31 सदस्यीय JPC गठित, संजय जायसवाल होंगे अध्यक्ष

नई दिल्ली। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की विस्तृत समीक्षा के लिए संसद की 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का गठन कर दिया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समिति के सदस्यों के नाम घोषित किए। भाजपा सांसद संजय जायसवाल को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं।

समिति में भाजपा के अलावा कांग्रेस, जदयू, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, सपा, एनसीपी, एनसीपी-एसपी, शिवसेना, टीडीपी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग समेत विभिन्न दलों के सांसदों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। लोकसभा सदस्यों में भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, निशिकांत दुबे, ए. राजा, सुप्रिया सुले और कल्याण बनर्जी प्रमुख नाम हैं। राज्यसभा से हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल निकम, प्रफुल्ल पटेल, संजय कुमार झा और मेनका गुरुस्वामी समेत अन्य सदस्य समिति में शामिल हैं।

शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

दोनों सदनों ने 12 अगस्त को विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब समिति को विधेयक के प्रावधानों की जांच कर अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में पेश करनी है।

विदेशी चंदे और संपत्तियों पर निगरानी का प्रस्ताव

FCRA संशोधन विधेयक में विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले संगठनों और गैर सरकारी संगठनों की निगरानी को मजबूत करने का प्रस्ताव है। विधेयक में एक नामित प्राधिकरण बनाने की बात कही गई है, जो किसी संगठन का FCRA पंजीकरण रद होने, वापस लिए जाने या नवीनीकरण नहीं होने की स्थिति में विदेशी अंशदान से बनी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे की जिम्मेदारी संभाल सकेगा।

विधेयक को लेकर विपक्ष और कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित प्रावधानों से NGOs और अल्पसंख्यक संस्थाओं पर असर पड़ सकता है। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि संशोधनों का उद्देश्य विदेशी अंशदान के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

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