Wednesday, January 7, 2026

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EPFO पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 11 साल से नहीं बढ़ी ‘सैलरी लिमिट’, केंद्र सरकार को 4 महीने में फैसला लेने का आदेश

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना के दायरे को लेकर एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। जस्टिस जे. के. माहेश्वरी और जस्टिस ए. एस. चांदुरकर की पीठ ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह ईपीएफओ के तहत आने वाली वेतन सीमा (Wage Ceiling) में संशोधन पर अगले चार महीने के भीतर कोई ठोस निर्णय ले। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि पिछले 11 वर्षों से इस सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे करोड़ों कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित हैं।

क्या है पूरा मामला?

सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया था कि वर्तमान में ईपीएफओ की वेतन सीमा मात्र ₹15,000 प्रति माह है। इसका मतलब है कि जिन कर्मचारियों का मूल वेतन (Basic Salary) ₹15,000 से अधिक है, वे अनिवार्य रूप से इस योजना के दायरे में नहीं आते।

कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें:

  • 11 साल का इंतजार: अदालत ने संज्ञान लिया कि आखिरी बार वेतन सीमा में बदलाव साल 2014 में किया गया था, जब इसे ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। तब से लेकर अब तक महंगाई और न्यूनतम वेतन में भारी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ईपीएफ की सीमा स्थिर है।
  • बड़ी आबादी हो रही बाहर: याचिकाकर्ता के वकीलों (प्रणव सचदेवा और नेहा राठी) ने तर्क दिया कि केंद्र और विभिन्न राज्यों द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी अब ₹15,000 से अधिक हो चुकी है। ऐसे में यह योजना अपने मूल उद्देश्य ‘सामाजिक सुरक्षा’ को खो रही है क्योंकि अधिकांश श्रमिक इस सीमा के बाहर हो गए हैं।
  • समय सीमा तय: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चार महीने का समय देते हुए कहा कि वह याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन (Representation) पर विचार करे और इस पर अपना रुख स्पष्ट करे।

वेतन सीमा बढ़ने से क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार इस सीमा को बढ़ाकर ₹21,000 या ₹25,000 (जैसी कि चर्चा है) करती है, तो इसके निम्नलिखित प्रभाव होंगे:

  1. दायरे में विस्तार: निजी क्षेत्र के लाखों नए कर्मचारी ईपीएफ और ईपीएस (पेंशन) योजना के तहत कवर हो सकेंगे।
  2. पेंशन में बढ़ोतरी: वेतन सीमा बढ़ने से ईपीएस (EPS-95) में होने वाला अंशदान बढ़ेगा, जिससे भविष्य में कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन राशि में भी इजाफा होगा।
  3. अनिवार्य बचत: अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी अनिवार्य भविष्य निधि के माध्यम से अपनी सेवानिवृत्ति के लिए बड़ी राशि जमा कर सकेंगे।

पिछली सिफारिशों का हवाला

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि ईपीएफओ के केंद्रीय बोर्ड (CBT) ने जुलाई 2022 में ही वेतन सीमा बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। 16वीं लोकसभा की लोक लेखा समिति (PAC) ने भी समय-समय पर इस सीमा को महंगाई के अनुरूप संशोधित करने का सुझाव दिया था।

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