नई दिल्ली/पोखरण: भारतीय सेना की मारक क्षमता को और अधिक घातक बनाने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में स्वदेशी रूप से विकसित ‘मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल’ (MPATGM) का सफल परीक्षण किया गया। इस परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मिसाइल ने अत्यधिक सटीकता के साथ एक ‘चलते हुए’ डमी टैंक (Moving Target) को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। इस सफलता के साथ ही भारत अब उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी खुद की ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) श्रेणी की पोर्टेबल मिसाइल तकनीक है।
परीक्षण की मुख्य विशेषताएं: अचूक रहा निशाना
DRDO के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह परीक्षण मिसाइल के सभी तकनीकी मानकों पर खरा उतरा है:
- सटीक मारक क्षमता: मिसाइल ने अत्याधुनिक इन्फ्रारेड इमेजिंग सीकर (IIR Seeker) की मदद से चलते हुए टारगेट को ट्रैक किया और उस पर सटीक प्रहार किया।
- टॉप अटैक क्षमता: यह मिसाइल दुश्मन के टैंक पर ऊपर से हमला (Top Attack) करने में सक्षम है, जहाँ टैंक का कवच सबसे कमजोर होता है।
- अंधेरे में भी कारगर: इस मिसाइल को दिन और रात, दोनों समय समान सटीकता के साथ दागा जा सकता है।
क्या है MPATGM और क्यों है यह खास?
यह मिसाइल सिस्टम आधुनिक युद्ध क्षेत्र में ‘गेम-चेंजर’ साबित होने वाला है:
- पोर्टेबल और हल्का: इसे एक सैनिक आसानी से अपने कंधे पर रखकर ले जा सकता है और कहीं से भी लॉन्च कर सकता है। इसकी वजन-क्षमता इसे पहाड़ों और घने जंगलों में बेहद उपयोगी बनाती है।
- स्वदेशी तकनीक: इसे पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूत करता है।
- दागो और भूल जाओ (Fire & Forget): एक बार मिसाइल दागने के बाद, सैनिक को उसे गाइड करने की जरूरत नहीं होती। मिसाइल खुद ही टारगेट का पीछा कर उसे तबाह कर देती है, जिससे सैनिक को तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने का मौका मिलता है।
रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए DRDO और भारतीय सेना को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक भारतीय थल सेना को और अधिक आधुनिक और शक्तिशाली बनाएगी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वी लद्दाख जैसे दुर्गम इलाकों में, जहाँ भारी टैंकों को ले जाना मुश्किल होता है, वहां यह पोर्टेबल मिसाइल दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों के लिए काल साबित होगी।
निष्कर्ष: रक्षा निर्यात में बढ़ेगा दबदबा
इस मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद अब इसके ‘यूजर ट्रायल’ के अंतिम चरण पूरे हो रहे हैं, जिसके बाद इसे जल्द ही भारतीय सेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि भारत इस तकनीक को मित्र देशों को निर्यात भी कर सकता है, जिससे वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की साख और बढ़ेगी।





