नई दिल्ली: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों ने अदम्य साहस और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष साइक्लोथान के दौरान सीआईएसएफ की टीम ने महज 25 दिनों में 6,553 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश में देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित करना और राष्ट्रीय एकता व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना था।
यात्रा का रूट और चुनौतियां
यह साइक्लोथान भारत के भौगोलिक विस्तार को कवर करने वाली एक चुनौतीपूर्ण यात्रा थी:
- विस्तृत मार्ग: जवानों ने इस यात्रा के दौरान देश के विभिन्न राज्यों, दुर्गम रास्तों और चुनौतीपूर्ण मौसम का सामना किया। यह मार्ग भारत की विविधता और सीमाओं को जोड़ते हुए तैयार किया गया था।
- 25 दिनों का कड़ा लक्ष्य: औसतन हर दिन जवानों ने लगभग 260 किलोमीटर से अधिक की दूरी साइकिल से तय की, जो उनकी उत्कृष्ट ट्रेनिंग और मानसिक मजबूती को दर्शाता है।
- मौसम और थकान को दी मात: भीषण गर्मी, बारिश और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बावजूद जवानों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई।
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ का उत्सव
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम का ऊर्जा केंद्र रहा है। इस ऐतिहासिक वर्षगांठ को मनाने के लिए सीआईएसएफ ने साइकिल चलाने को एक माध्यम के रूप में चुना:
- देशभक्ति का प्रसार: यात्रा के दौरान टीम जिस भी शहर या गांव से गुजरी, वहां स्थानीय लोगों और युवाओं ने ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष के साथ उनका स्वागत किया।
- सांस्कृतिक जुड़ाव: जवानों ने रास्ते में कई ऐतिहासिक स्मारकों और शहीदों के स्मारकों पर रुककर श्रद्धांजलि अर्पित की, जिससे यह यात्रा केवल एक खेल आयोजन न रहकर एक राष्ट्रव्यापी अभियान बन गई।
- फिट इंडिया का संदेश: इस आयोजन के जरिए बल ने प्रधानमंत्री के ‘फिट इंडिया’ अभियान को भी नई गति दी है।
समापन समारोह और सम्मान
दिल्ली में आयोजित एक भव्य समापन समारोह में सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेने वाले सभी जवानों का स्वागत किया:
- वीरता और अनुशासन का संगम: अधिकारियों ने कहा कि सीआईएसएफ न केवल देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है, बल्कि राष्ट्रीय गौरव के आयोजनों में भी अग्रणी भूमिका निभाता है।
- मेडल और प्रशस्ति पत्र: साइक्लोथान पूरी करने वाले जवानों को उनकी इस उपलब्धि के लिए विशेष सम्मान और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।





