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CAPF में IPS प्रतिनियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा- क्या नेतृत्व के लिए योग्य अधिकारी नहीं?

नई दिल्ली, 3 सितंबर। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति और वरिष्ठता को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कड़े सवाल किए हैं। अदालत ने पूछा कि क्या CAPF में नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने के लिए पर्याप्त योग्य अधिकारी नहीं हैं।

न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर की पीठ ने बुधवार को सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से यह सवाल किया। न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि CRPF, ITBP और BSF में कई अधिकारी 25-30 वर्षों तक सेवा कर चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें नेतृत्व की भूमिकाएं नहीं दी गईं।

पीठ ने CAPF अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही पदोन्नति और नेतृत्व संबंधी शिकायतों पर चिंता जताई। न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि ये अधिकारी देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाते हैं और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान भी देते हैं। ऐसे में उन्हें नेतृत्व के अवसरों से वंचित रखने पर अदालत ने सवाल उठाया।

केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि CAPF से जुड़ा फैसला IPS बनाम CAPF का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकार का नीतिगत निर्णय है। हालांकि, अदालत ने इस विवाद को लेकर केंद्र के रुख पर सवाल जारी रखे।

मामला केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 से भी जुड़ा है। CAPF के 34 अधिकारियों ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका आरोप है कि कानून वरिष्ठ पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का रास्ता बनाए रखता है और इससे CAPF के अपने कैडर अधिकारियों की पदोन्नति प्रभावित होती है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में केंद्र को CAPF में वरिष्ठ स्तर तक IPS प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कैडर अधिकारियों की पदोन्नति और करियर में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए कैडर समीक्षा के भी निर्देश दिए थे।

 

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