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AI समिट में हंगामा करने वालों का पर्दाफाश: बिहार और यूपी के तीन कांग्रेस कार्यकर्ता चिन्हित; दिल्ली पुलिस की जांच में हुआ बड़ा खुलासा

नई दिल्ली: देश की राजधानी में आयोजित हाई-प्रोफाइल ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान व्यवधान डालने और नारेबाजी करने वाले उपद्रवियों की पहचान कर ली गई है। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस हंगामे के पीछे राजनीतिक संलिप्तता थी। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए मुख्य आरोपियों में बिहार के दो और उत्तर प्रदेश का एक कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल है। इन लोगों ने समिट के उस सत्र में बाधा डालने की कोशिश की थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वैश्विक तकनीकी दिग्गज मौजूद थे।

कैसे हुई पहचान? (CCTV और फेशियल रिकग्निशन का कमाल)

सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपियों तक पहुँचने के लिए उसी तकनीक का सहारा लिया, जिस पर समिट में चर्चा हो रही थी:

  • डिजिटल सबूत: पुलिस ने समिट स्थल पर लगे उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरों और ‘एआई-आधारित फेशियल रिकग्निशन’ (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) का उपयोग किया।
  • सोशल मीडिया प्रोफाइल: आरोपियों के चेहरों का मिलान जब सार्वजनिक डेटाबेस से किया गया, तो उनकी पहचान राजनीतिक दल के सक्रिय कार्यकर्ताओं के रूप में हुई। उनके सोशल मीडिया हैंडल्स से उनके राजनीतिक जुड़ाव की पुष्टि हुई है।

आरोपियों का विवरण और बैकग्राउंड

पकड़े गए तीन युवकों की पहचान उजागर करते हुए पुलिस ने बताया कि वे योजनाबद्ध तरीके से दिल्ली पहुँचे थे:

  1. बिहार के दो कार्यकर्ता: इनमें से एक आरोपी बिहार के पटना और दूसरा मुजफ्फरपुर जिले का रहने वाला है। दोनों ही युवक जिला स्तर पर कांग्रेस की युवा इकाई से जुड़े बताए जा रहे हैं।
  2. उत्तर प्रदेश का कार्यकर्ता: तीसरा आरोपी उत्तर प्रदेश के मेरठ का निवासी है। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई दिनों से दिल्ली में ही डेरा डाले हुए था और स्थानीय संपर्कों के जरिए पास हासिल कर समिट में घुसा था।

बवाल की वजह: क्या था मकसद?

शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका उद्देश्य समिट के जरिए केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करना था:

  • नारेबाजी और पोस्टर: आरोपियों ने एआई तकनीक के कारण बढ़ती बेरोजगारी और डेटा गोपनीयता जैसे मुद्दों पर तख्तियां दिखाने और नारेबाजी करने की कोशिश की थी।
  • सुरक्षा में सेंध: सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद ये लोग वीवीआईपी गैलरी के इतने करीब कैसे पहुँच गए। उनके पास मौजूद ‘डेलीगेट पास’ के असली या फर्जी होने की भी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और कानूनी कार्रवाई

इस खुलासे के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है:

  • भाजपा का आरोप: सत्ता पक्ष ने इसे भारत की वैश्विक छवि को खराब करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि जब दुनिया भारत की तकनीकी शक्ति का लोहा मान रही है, तब विपक्षी कार्यकर्ता व्यवधान पैदा कर रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई: दिल्ली पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ ‘सरकारी कार्य में बाधा डालने’, ‘शांति भंग करने’ और ‘सुरक्षा नियमों के उल्लंघन’ की धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस कोर्ट से उनकी रिमांड मांग सकती है ताकि इस साजिश के पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ का पता लगाया जा सके।

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