Tuesday, February 17, 2026

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‘AI तकनीक केवल सहायक, जजों का विकल्प नहीं’: न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बोले जस्टिस माहेश्वरी; मानवीय संवेदनाओं को बताया सर्वोपरि

नई दिल्ली: देश की न्याय प्रणाली में तकनीकी सुधारों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस माहेश्वरी ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी बयान दिया है। एक कानूनी सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह कभी भी एक न्यायाधीश (जज) का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने तर्क दिया कि न्याय करना केवल कानूनों को लागू करना नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय संवेदना, विवेक और परिस्थितियों की गहरी समझ शामिल होती है, जो फिलहाल किसी भी मशीन या एल्गोरिदम के पास नहीं है।

तकनीक बनाम मानवीय विवेक: ‘विवेक का कोई डिजिटल विकल्प नहीं’

जस्टिस माहेश्वरी ने अपने संबोधन में तकनीक की सीमाओं को रेखांकित करते हुए कई अहम बिंदु साझा किए:

  • भावनाओं का अभाव: उन्होंने कहा कि एआई डेटा और उपलब्ध जानकारी के आधार पर परिणाम दे सकता है, लेकिन वह किसी पीड़ित के दर्द या किसी आरोपी की विशेष परिस्थितियों को नहीं समझ सकता। न्याय में ‘विवेक’ (Judicial Mind) का उपयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है।
  • तर्कों की जटिलता: कानूनी लड़ाइयों में अक्सर ऐसे मोड़ आते हैं जहाँ कानून की नई व्याख्या की आवश्यकता होती है। एआई केवल पुराने डेटा पर काम करता है, जबकि एक न्यायाधीश भविष्य के लिए नए कानूनी सिद्धांत (Precedents) स्थापित करता है।
  • पक्षपात का खतरा: जस्टिस माहेश्वरी ने चेतावनी दी कि यदि एआई का डेटा पक्षपाती है, तो उसके फैसले भी भेदभावपूर्ण हो सकते हैं, जो न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।

एआई का सही उपयोग: ‘न्याय को गति देने में मददगार’

हालांकि उन्होंने जजों की जगह लेने की बात को नकारा, लेकिन उन्होंने न्यायपालिका में एआई के सकारात्मक उपयोग की सराहना भी की:

  1. दस्तावेजों का प्रबंधन: कोर्ट में लंबित लाखों मामलों के दस्तावेजों को सहेजने, उन्हें खोजने और शोध (Research) कार्य में एआई एक बेहतरीन सहायक साबित हो सकता है।
  2. भाषा की बाधा खत्म करना: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों का विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने के लिए एआई का उपयोग न्याय को आम आदमी तक पहुँचाने में क्रांतिकारी कदम है।
  3. प्रशासनिक दक्षता: तारीखों का निर्धारण और अदालती कामकाज के प्रबंधन में तकनीक का उपयोग करने से जजों का कीमती समय बचेगा, जिसे वे जटिल मामलों की सुनवाई में लगा सकेंगे।

कानूनी जगत में बहस: क्या भविष्य में बदल जाएगा न्याय का तरीका?

जस्टिस माहेश्वरी की इस टिप्पणी ने कानूनी विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है:

  • तकनीकी विशेषज्ञों का तर्क: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और कम जटिल मामलों (जैसे ट्रैफिक चालान या चेक बाउंस) में एआई आधारित समाधानों से पेंडेंसी कम की जा सकती है।
  • वकीलों की चिंता: कानूनी बिरादरी का एक वर्ग एआई के कारण वकीलों और जूनियर शोधकर्ताओं की भूमिका कम होने को लेकर चिंतित है।

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