अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को एक अहम फैसला लेते हुए टेक्सास के डिटेंशन सेंटर में बंद वेनेज़ुएला के लोगों को फिलहाल उनके देश वापस भेजने पर रोक लगा दी है। यह फैसला 18वीं सदी के पुराने कानून एलियन एनिमीज़ एक्ट (1798) के तहत किए जा रहे निर्वासन के खिलाफ दायर याचिका पर आया है।
बता दें कि यह मामला अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में की गई आपात अपील से जुड़ा है, जिसमें एसीएलयू का कहना था कि ट्रंप प्रशासन इस युद्धकालीन कानून का इस्तेमाल करके वेनेज़ुएला के लोगों को अवैध तरीके से वापस भेजने की कोशिश कर रहा है।
मामले में एसीएलयू की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यह आदेश दिया है कि इन लोगों को अगले आदेश तक डिपोर्ट न किया जाए। हालांकि, जस्टिस क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल एलिटो ने इस फैसले से असहमति जताई।
गौरतलब है कि मामले में एसीएलयू ने आरोप लगाते हुए कहा था कि प्रशासन जानबूझकर उन्हें ऐसे डिटेंशन सेंटर में भेज रहा है जहाँ कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है, ताकि निर्वासन किया जा सके। साथ ही एसएलयू के वकील ली गेलरेंट ने दावा किया कि प्रशासन इन लोगों को शुक्रवार की रात बसों में भरकर एयरपोर्ट ले गया ताकि शनिवार को डिपोर्ट कर सके। इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट में आपात याचिका दायर की गई।
गौरतलब है कि ब्लूबोनेट डिटेंशन सेंटर (उत्तरी टेक्सास) में कुछ वेनेज़ुएला के नागरिक बंद हैं। आव्रजन अधिकारी उन्हें ट्रेन डी अरागुआ नाम के खतरनाक गैंग का सदस्य बताकर तुरंत निर्वासित करना चाहते हैं। एसीएलयू ने आरोप लगाया कि इन लोगों को बिना सुनवाई का मौका दिए सीधे डिपोर्ट किया जा रहा है। कई लोगों को अंग्रेजी में दस्तावेज़ों पर ज़बरदस्ती हस्ताक्षर कराए गए, जबकि वे केवल स्पेनिश जानते थे।





