नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई स्थगित कर दी गई। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को निर्वाचन आयोग के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई दिवाली अवकाश के बाद होने की संभावना है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले से संबंधित अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई की। अदालत ने राज्यसभा सांसद डोला सेन की ओर से दायर नई याचिका पर निर्वाचन आयोग सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
निर्वाचन आयोग के हलफनामे पर मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राकेश सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि निर्वाचन आयोग का हलफनामा सुनवाई से एक दिन पहले मिला था। ऐसे में उसका विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए 10 दिन की मोहलत दे दी।
निर्वाचन आयोग ने अपने 248 पन्नों के हलफनामे में SIR प्रक्रिया और आयोग की निर्णय लेने की व्यवस्था का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR से जुड़े फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए।
याचिकाओं में क्या उठाए गए सवाल?
मामले में दायर याचिकाओं में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली, कथित एकतरफा फैसलों और मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कुछ याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आयोग के महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया।
विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिका में भी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, ये सभी आरोप याचिकाओं में लगाए गए हैं और इन पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के जवाब और निर्वाचन आयोग की दलीलों पर विचार किया जाएगा।





