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ट्रंप रखना चाहते थे अटलांटिक महासागर का नाम ‘ट्रंप महासागर’, सुंदर पिचाई ने कर दिया इनकार; अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताई वजह

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर भौगोलिक स्थलों के नाम बदलने को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने अटलांटिक महासागर का नाम बदलकर ‘ट्रंप महासागर’ रखने का विचार सामने रखा था। हालांकि, ट्रंप के मुताबिक, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। पिचाई ने कथित तौर पर कहा कि महासागर कई देशों से जुड़े होते हैं, इसलिए उनका नाम बदलना आसान नहीं है।

ट्रंप ने दक्षिण कैरोलिना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सुंदर पिचाई के साथ हुई कथित बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने गूगल प्रमुख से पूछा था कि क्या अटलांटिक महासागर का नाम बदला जा सकता है। इस पर पिचाई ने कथित तौर पर जवाब दिया कि इस बार ऐसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि महासागर अनेक देशों तक फैले होते हैं।

पहले भी नाम बदलने के प्रस्ताव दे चुके हैं ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी कई भौगोलिक स्थलों के नाम बदलने की पहल कर चुके हैं। उन्होंने मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। इसके बाद अगस्त 2026 में ओंटारियो झील का नाम अमेरिकी सरकारी इस्तेमाल के लिए ‘लेक अमेरिका’ करने का निर्देश भी दिया गया।

ट्रंप का तर्क रहा है कि अमेरिका को अपनी भौगोलिक पहचान से जुड़े नामों में अधिक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने पहले अटलांटिक या प्रशांत महासागर में से किसी एक का नाम बदलकर अपने नाम पर रखने की इच्छा भी जाहिर की थी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आसान नहीं नाम बदलना

अटलांटिक महासागर कई देशों के तटों से जुड़ा है और इसका नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित है। ऐसे में अमेरिका की ओर से नाम बदलने का कोई फैसला दूसरे देशों या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर स्वतः लागू नहीं होगा।

गूगल मैप्स भी भौगोलिक नामों को प्रदर्शित करने के लिए संबंधित देशों के आधिकारिक स्रोतों का इस्तेमाल करता है। इसी कारण अमेरिका में दिखाई देने वाले नाम अन्य देशों में अलग हो सकते हैं।

हालांकि, सुंदर पिचाई और ट्रंप के बीच हुई कथित बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल ‘ट्रंप महासागर’ नाम को लेकर कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय निर्णय सामने नहीं आया है।

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