गोपेश्वर (चमोली)। चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली रविवार को देवलधार गांव स्थित ज्वाला माता मंदिर पहुंची। यहां रात्रि विश्राम के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना की और भजन-कीर्तन कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। सोमवार को डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी, जहां आगामी छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, जगह-जगह हुआ स्वागत
रविवार सुबह करीब आठ बजे भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली श्रद्धालुओं के साथ धाम से देवलधार गांव के लिए रवाना हुई। यात्रा के दौरान डोली रामगंगा, पित्रधार, पनार, ल्वींठी और पुंग बुग्याल होते हुए ग्वाड़ गांव के जाख मंदिर पहुंची। यहां ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना कर भगवान को अर्घ्य अर्पित किया।
इसके बाद डोली देवलधार गांव स्थित ज्वाला माता मंदिर पहुंची। यहां बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान रुद्रनाथ के दर्शन किए और भजन-कीर्तन के माध्यम से आराधना की।
19 अक्टूबर को गोपीनाथ मंदिर में होगी स्थापना
सोमवार सुबह करीब नौ बजे उत्सव डोली गोपेश्वर के लिए रवाना होगी। विभिन्न गांवों से होते हुए डोली भगवान रुद्रनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी। यहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान को विराजमान कराया जाएगा और पूजा-अर्चना शुरू होगी।
इससे पहले शनिवार, 17 अक्टूबर को उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। इसके बाद भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना हुई।
छह माह तक गोपेश्वर में होंगे दर्शन
शीतकाल के दौरान रुद्रनाथ धाम में प्रतिकूल मौसम के कारण नियमित दर्शन संभव नहीं होते। ऐसे में परंपरा के अनुसार भगवान की पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में की जाती है। इससे श्रद्धालु शीतकाल में भी अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे।
डोली यात्रा को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में उत्साह है। भगवान रुद्रनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचने के साथ ही गोपेश्वर में धार्मिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी।





